बावीसा ब्राह्मण समाज का

7 फरवरी 2010 को अखिल भारतीय बावीसा ब्राह्मण समाज इंदौर द्वारा सामूहिक विवाह का 15 वां आयोजन रखा गया है । इस मंगल अनुष्ठान का उद्देश्य समाज के सर्वांगीण विकास हेतु समाज में मितव्ययिता परिवारों में समानता एवं सौहार्द्रता, स्वस्थ मानसिकता,मिलनसारिता, प्रगतिशीलता तथा दूरदर्शिता स्थापित करना है । विवाह में सम्मिलित होने वाले पक्ष हेतु पंजीयन राशि 12001 रुपये सुनिश्चित है। पंजीयन हेतु 2001 रुपये अग्रिम दिया जाना
है । कार्यक्रम हेतु श्री विजय दुबे इंदौर-98266-66083 , उपाध्यक्ष श्रीमती संध्या शुक्ला,इंदौर-94259-17270, युवा अध्यक्ष अजय त्रिवेदी इंदौर - 98260-98171 से संपर्क किया जा सकता है ।  read more »

राजधानी के ब्राह्मण पार्षदों का सम्मान

रायपुर । विप्र भवन में नवनिर्वाचित 13 ब्राह्मण पार्षदों का सम्मान मुख्य अतिथि विधायक बद्रीधर दीवान, विशिष्ठ अतिथि पद्यश्री महादेव पांडेय व डॉ. शिव कुमार पाण्डेय द्वारा किया गया । इस अवसर पर श्री दीवान ने सभी पार्षदों को बधाई देते हुए कहा कि समाज आपको सम्मानितकरके सामाजिक संगठन को मजबूत करने का प्रयासकर रही है । उन्होंने कहा कि जहां से आप निर्वाचित हुए हैं वहां आप पार्षह है लेकिन समाज केलिए उत्प्रेरक है । विशिष्ट अतिथि डॉ. महादेव पांडेय ने कहा कि आज के युवा अपनी भूमिका और जिम्मेदारी को समझ रहे हैं और इसके र्विहन में सफल भी हो रहे हैं । डॉ. शिव कुमार पाण्डेय ने कहा कि वे निष्पक्ष होकर उत्साह के साथ बिना फल की चिंता किए कर्म करते जाए । कार्यक्रम मे ंडॉ. कृपाराम शर्मा, अशोक शर्मा, रत्ना मिश्रा, विजयलक्ष्मी शर्मा ने अतिथियों का स्वागत
किया ।

सम्मानित होने वाले पार्षदों में दीनानाथ शर्मा, ज्ञानेश शर्मा, मृत्युंजय दुबे, प्रमोद दुबे, गोविन्द मिश्रा, सुभाष तिवारी, पूर्णप्रकाश झा, रितेश त्रिपाठी, अंजू शेखर तिवारी, मीनल चौबे, पुष्पा धमेन्द्र तिवारी, श्रीमती घनश्याम तिवारी एवं रेणु प्रशां, बक्षी शामिल है । कार्यक्रम का संचालन मेघेशतिवारी व आभार प्रदर्शन सुरेन्द्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर अनंतधर शर्मा , प्रो, अंजनी शुक्ला, वीरेन्द्र पाण्डे, सुरेन्द्र शुक्ला, स्वराजीलाल शर्मा, अविनाश शुक्ला, आनंद पांडेय, संजय दीवान शामिल
थे ।
डॉ. पूर्ण प्रकाश का सम्मान

रायपुर । मैथिल ब्राह्मण सभा द्वारा आयोजित कार्यक्रम में डॉ. पूर्ण प्रकाश झा को खमतराई वार्ड से निर्दलीय पार्षद चुने जाने पर बधाई देते हुए उनका अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि जीवेन्द्र नाथ ठाकुर ने कहा कि डॉ. पूर्णप्रकाश झा ने मैथिल समाज की उस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है जिसमें पं. रत्नाकर झा, विद्याभूषण ठाकुर और दिनेश दत्त मिश्र जैसे नेता और जनप्रतिनिधि शामिल है । कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने नवनिर्वाचित पार्षद का पुष्पहार सेस्वागत किया तथा शाल और श्रीफल भेंटकर उनका अभिनंदन किया । कार्यक्रम में संजीव ठाकुर, एस.के. झा, विपिन कुमार झा, आशुतोष झा, विभाष कुमार झा उपस्थित
थे ।
रायपुर । सरयूपारीण ब्राह्मण परिषद द्वारा ब्राह्मण पार्षदों का अभिनंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के आसंदी से प्रेस क्लब के अध्यक्ष अनिल पुसदकर ने कहा कि ब्राह्मण सर्वदा समाजहित एवं देश हित को सर्वोपरि मान कर कार्य करता है, हमें इस परंपराको अनवरत आगे बनाए रखना चाहिए । सुखिन: सर्वे संतु आचरण करने की सलाह दी । इस अवसर पर तेरह ब्राह्मण पार्षदों को शाल,श्रीफल एवं अभिनंदन पत्र देकर अभिनंदन किया गया ।

कार्यक्रम में रोहिताश त्रिपाठी, ध्रुवनाथ तिवारी, हरिओम तिवारी, शिव मूरत तिवारी, अरविंद शुक्ल, राजेन्द्र तिवारी, दिनेश तिवारी, अवधेश पांडे, वीके मिश्रा, जयदेव पांडे, बनारसी पांडे , राजेन्द्र मिश्र उपस्थित थे ।

विजय कुमार दुबे सम्मानित

बिलासपुर । ठाकुर छेदीलाल बैरिस्टर सम्मान प्राप्त अधिवक्ता विजय कुमार दुबे का कहना है कि इस सम्मान से उनकी जवाबदारी बढ़ गई है ।

जांजगीर तहसील के पास जर्वे नामक गांव में 22 अप्रैल 1950 को जन्म हुआ । मीडिल स्कूल तक की शिक्षा गांव में प्राप्त की , फिर जांजकीर से बीएससी पास करन ेके बाद राजेन्द्र कुमार सिंह उ.मा.शाला अकलतरा में डेढ़ वर्ष अध्यापन किया । स्वास्थ्य के कारम नौकरी छोड़ दी और खेती और छोटा मोटा व्यवसाय गांव में करते हुए प्रथम श्रेणी में एलएलबी की डिग्री प्राप्त की । अक्टूबर 1974 में जांजगीर तहसील न्यायालय में प्रेक्टिस प्रारंभ किया ।

विधि के क्षेत्र में हिन्दी में किताबे लिखी, जिसमें व्यवहारवाद के प्रारूप भारतीय परिसीमा अधिनियम नजूल लैंड, छग भू- राजस्व संहिता क्रिमिनल डाइजेस्ट प्रकाशित हो चुकी है। कुछ किताबें प्रकाशाधीन है । छग राज्सव निर्णय एवं दुर्घटना मुआवजा, प्रकरण नामक पत्रिका के संपादक मंडल में भी काम कर रहे हैं । विधि साहित्य का लेखन निरंतर कर रहे हैं, ताकि हिन्दी को समृध्द करने में योगदान दे सके । गरीबों को नि:शुल्क विधिक सहायता के लिए मैं अपने स्तर पर हमेशा काम करते रहा हूं, लोक अदालत के गठन संबंधी सुझावो में भी मैंने व्यापक पहलकी थी । म.प्र. विधिक कांग्रेस प्रकोष्ठ के माध्यम से 1981-82 में इसके लिए प्रारूप तैयार किया गया था जिसमें मैं एक सदस्य था ।  read more »

महाकुंभ मेले की विशेष स्नान तिथियां

लगभग तीन माह तक चलने वाले महाकुंभ के दौरान कभी भी स्नान करना पुण्यदायी है, लेकिन कुछ तिथियो ंपर स्नान करना विशेष रूप से पुण्यकारी है । येतिथियां है 20 जनवरी बसंत पंचमी, 30 जनवरी माघ पूर्णिमा, 12 फरवरी महाशिवरात्रि, 15 मार्च सोमवती अमावश्यता, 16 मार्च नव संवत्सर प्रारंभ, 24 मार्च रामनवमी, 30 मार्च चैत्र पूर्णिमा, 14 अप्रैल बैसाखी, और 28 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा ।

महाकुंभ में शाही स्नान

महाकुंभ मेले का मुख्य आकर्षण शाही स्नान होता है । जब हजारों लाखों की संख्या में साधु संतों की टोली एक साथ पवित्र नदी में स्नान के लिए निकलती है । इस स्नान में अठारह अखाड़ों के साधु एकत्रित होते हैं । तपोनिधि निरंजनी अखाड़ा, पंचदशनाम जूना अखाडा, उदासीन पंचायती अखाड़ा, निर्मल पंचायती अखाड़ा, पंचायती अखाड़ा, निर्मोही अखाड़ा, निर्वाणी अखाड़ा, दिगंबर अखाड़ा, पंच अटल अखाड़ा, महानिर्वाणी पंचायत अखाड़ा, आह्वहान अखाड़ा, अग्नि अखाड़ा आदि अखाड़ों के साधुीओं का प्रतिनिधित्व वैष्णी अखाड़ा करता है । शाही स्नान के पश्चात ही इन अखाड़ों की भव्य झांकी आयोजित की जाती है, जिसमें साधुओं की शोभायात्रा को देखने केलिए भारी संख्या में श्रध्दालु जुटते हैं ।

ग्रहों का अनूठा मेल

हरिद्वार में कुंभ मेले का योग कुंभ राशि में बृहस्पति ग्रह की उपस्थिति पर निर्भर करता है । जब सूर्य मेष राशि में विचरण करे और उसी दौरान बृहस्पति कुंभ राशि में आ जाए तो ऐसे दुर्लभ संयोग पर ही हरिद्वार में गंगा स्नान की परंपरा है । बृहस्पति ग्रह प्रत्येक राशि में लगभग एक वर्षतक विचरण करता है, इसलिए दोबारा कुंभ राशि तक पहुंचने में बृहस्पति को बारह वर्ष लग जाते हैं , तभी महाकुंभ मेले का आयोजन होता है । कहने का अर्थ है कि सूर्य, चंद्र और बृहस्पति की राशिगत स्थितियों के आधार पर ही कुंभ मेले की तिथि का पुर्वानुमान लगा लिया जाता है ।

कुंभ मेले के आयोजन से जुड़ी मान्यताओं के संदर्भ में रामायण, महाभारत, विष्णु पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, दुर्वासा ऋषि के श्राप से मुक्त होने और स्वयं को पुन: शक्तिशाली बनाने के लिए इंद्र और सभी देवताओं को अमृत की आवश्यकता हुई । इसके लिए उन्होंने दानवों को समुद्र मंथन के लिए राजी कर लिया । मंथन से उत्पन्न विभिन्न रत्नों के बाद जब अमृत भरा कुंभ निकला, तो देवताओं और दानवों में इसे प्राप्त करने के लिए युध्द हुआ ।इस छीना झपटी में कुंभ से अमृत छलककर हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक में गिरा। तभी से इन स्थानों को पवित्र मानकर यहां स्थित पावन नदियों के तट पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाने लगा ।

भारतीय उपमहाद्वीप में मनाए जाने वाले अनेक पर्वों में से महाकुंभ अपनी तरह का अकेला और विशिष्ट आस्था से जुड़ा स्नान पर्व है । इस अवसर पर हजारों की संख्या में स्त्री- पुरूष संयासी (साधु) अपने शरीर पर राख लगाए हुए मेले में सम्मिलित होते हैं । इसके साथ ही धार्मिक गोष्ठियों, सामूहिक भजन - कीर्तन का भी आयोजन व्यापक स्तर पर किया जाता है ।  read more »

महाकुंभ आस्था का स्नानपर्व

21 वीं सदी का पहला महाकुंभ मेला विगत मकर संक्रांति से हरिद्वार मे ंपतित पावनी गंगा के तट पर शुरू हो गया है । श्रध्दालुओं के मन में इसके प्रति कितनी गहरी आस्था है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि मेले के पहले ही दिन दस लाख से अधिक लोगों ने गंगा में स्नान किया । यह महाकुंभ प्रत्येक बारह वर्षके बाद देश के चार तीर्थ स्थलों पर क्रमिक रूप से आयोजित होता है । ये तीर्थ स्थल है - गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों का संगम तट प्रयाग (इलाहाबाद), गंगा नदी के किनारे स्थित हरिद्वार, शिप्रा नदी के तट पर स्थित उज्जैन और गोदावरी नदी के तट पर स्थित नासिक। हालांकि प्रत्येक छह वर्ष के अतंराल पर हरिद्वार और प्रयाग में अर्ध्दकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है, लेकिन बारह वर्ष के पश्चात आयोजित किए जाने वाले पूर्ण कुंभ का विशेष महत्व है । हिन्दू आस्ता से जुड़े इस मेले में आन ेवाले लाखों करोड़ों श्रध्दालु विभिन्न शुभ तिथियों पर पवित्र स्नान करते हैं । मकर संक्रांति से आरंभ हुआ यह मेला, इस वर्ष 28 अप्रैल बैसाख पूर्णिमा को आयोजित होने वाले विशेष स्नान के बाद संपन्न होगा । इस दौरान मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी, माघ पूर्णिमा, महाशिवरात्रि, सोमवती अमावस्या, नवसंवत्सर, रामनवमी चैत्र पूर्णिमा और मेष संक्रांति तिथियों पर भी विशेष स्नान किया जाएगा ।

Dhananjay Tripathi's picture

नागरिक बोध को जागृत कर सर्व

समाजों के कल्याथार्थ कार्य करें

राष्ट्र व राज्य का नेतृत्व करने युवाओं को आज आगे आने की आवश्यकता है । ऐसे युवा जो ईमानदारी पूर्वक राजनीति या देश को अपना पेशा बनाना चाहते हों और उनमें वास्तव में उर्जा व काबिलियत हो ऐसे ईमानदार पेशवर युवा नेतृत्व को यदि जनता चुनकर राजनीति में स्थापित करे तो एक प्रतिस्पर्धा का माहौल देश के भीतर निर्मित होगा । लेकिन वर्तमान समय में देश में नागरिक बोध पैदा करने की आवश्यकता है । जिसके तहत देश हमें देता है सब कुछ, हम भी कुछ देना सीखें । आखिर इस सत्तर साल के समाज में क्या बदल गया यह समझ से परे है। लाख उपलब्धियों के बावजूद वर्तमान में ढेर सारी विसंगतियां और आक्रोश नजर आता है । गणतंत्र में हमें अपने योगदान पर विचार करना होगा । केवल मोमबत्ती जलाने या आपसी चर्चाकरने मात्र से या सरकारों व राजनीति को कोसने मात्र से कोई समाधान उत्पन्न नहीं होने वाला । पुरे तंत्र में हमारी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिए । खासकर गणतंत्र में जब राजनीति प्रधान हो और सभी चीजें राजनीति के इर्द गिर्द घूमती हो तो राजनीति में खास सक्रियता और देश के प्रति दायित्व बोध की एक ऐसी भावना हमें हमारी युवा पीढ़ी में जागृत करने की आवश्यकता है जिस पर देश गर्व कर सके ।

हमारा देश वैसे ही हिन्दू धर्म की देन, वर्ण व्यवस्था से जाति उपजातियों में बंटा हुआ है । देश की उन्नति, भाईचारा और विकास के दूसरे पायदानों तक पहुंचने के बावजूद हर दस घर में अपने को दूसरों से अलग समझने बाहर की जाति या सहगोत्र में शादी करने पर आज भी जाति पंचायतें बैठती और फैसलें लेती हैं । अब जरूरत है जोड़ों को सीमेन्ट से भरने की, जहां राजनीतिक बाज छैनियां लेकर घूम रहे हैं जहाँ भी दरार दिखे वहां मत चुको पत्थरों को तोड़ डालो ताकि उनका राजनीतिक फायदा हो और उन्हें पांच दस हजार की भीड़ जुटाना आसान हो सके । छोटे- छोटे टुकड़ों को जोड़कर अपना वोट बैंक बना सकें । छोटे- छोटे राज्य बनाकर वहाँ से बड़ी जमात से मुयमंत्री का पद पाकर अपनी बादशाहत कायम कर सकें । समाज को तोड़ने में उन्हें फायदा और आसानी नजर आती है । जैसे एक 50 फीट ऊंचा पेड़ भी 6 इंच कुल्हाड़ी के सामने बेबश और मजबूर नजर आता है और कटकर चूर चूर हो जाता है । ऐसी की राजनीति कुल्हाड़ी की भांति देश को राज्यों को बांटने में लगी है ।

लोकतंत्र अब षडयंत्र में बदल गया है । साजिश जनता के खिलाफ राज माफिया का और आंसू जनता के बनते जा रहे हैं । छत्तीसगढ़ में अभी-अभी विधानसभा के लोकसभा के फिर नगरों के अब गांवों के चुनाव सपन्न हुए हैं । इनके बीच छुटमुट तरीके से सहकारिता के चुनाव भी हो गये । लोकतंत्र पर पैसा और राजतंत्र और राजशाही का समन्वय यहां निरंतर देखने को मिल रहा है । पार्टियां एक दूसरे को दिखावा कोसते हुए पार्टी नेतृत्व बिके हुए महसूस होते हैं । ऐसे समय में समाज की अपनी महती जिमेदारी को युवाओं को महसूस करना होगा और देश के प्रति अपने नागरिक बोध को जागृत कर सर्व समाजों के कल्याथार्थ समग्र विकास की कल्पना को लेकर कार्य करने केलिए संकल्पित होकर आगे आने की आवश्यकता है ।

संगठन की दृष्टि से आने वाला समय परशुराम जयंती और छत्तीसगढ़ में परशुराम सद्भावना यात्रा का समय रहेगा मुझे विश्वास है कि आप सभी प्रबुध्द पाठक इन कार्यक्रमों की उपयोगिता जानकर चढ़बढ़कर हिस्सा लेकर संगठन को मजबूत बनायेंगे ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

डोंगरगांव युवा शाखा गठित

डोंगरगांव । सर्व ब्राह्मण समाज के प्रबुध्द युवा विप्रजनों की बैठक दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर प्रांगण में सम्पन्न हुई । जिसमे ंसर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पं. जयशंकर बाजपेयी उपस्थित थे । कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुरामके जयकारे के साथ शुरू हुआ । बैठक में समाज के उत्थान,संगठन में एकता वआपसी सामंजस्य स्थापित करने आदि विषयों पर चर्चा हुई। उसके उपरांत सर्व ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष की सहमति से प्रबुध्द युवा विप्रजनों की कार्यकाारिणी समिति गठित की गयी । जिसमें संरक्षण गण हृदय तिवारी, बद्रीनारायण शुक्ला, प्रशान्त नावलेकर, महेन्द्र दुबे, नरेन्द्र शर्मा, अध्यक्ष देवेन्द्र दुबे, उपाध्यक्ष जितेन्द्र शर्मा,संदीप रत्नाकर, राकेस दुबे, विक्की शर्मा, सचिव घनश्याम तिवारी, सहसचिव तुकेश्वर मिश्रा, रजनीश शर्मा, कोषाध्यक्ष प्रेम गोस्वामी, उपकोषाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, प्रचार प्रसार सचिव प्रदीप रत्नाकर, मुकेश भट्ट, हरीश शर्मा, दीपक शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य- लक्ष्मण कुंवर, राहुल मिश्रा, मिथलेश मिश्रा,अभय तिवारी, आलोक शर्मा, सतीश पांडे (विधिक सलाहकार) राकेश रत्नाकर को बनाया गया । बैठक को हृदेय तिवारी प्रशान्त नावलेकर, नरेन्द्र शर्मा, देवेन्द्र दुबे, अभय तिवारी, जितेन्द्र शर्मा, तुकेश्वर मिश्रा, महेन्द्र दुबे, प्रेम गोस्वामी, संदीप रत्नाकर ने संबोधित किया । कार्यक्रम का सफल संचालन महेन्द्र दुबे व आभार प्रदर्शन घनश्याम तिवारी ने किया ।  read more »

संतूर की खनक से सजी महफिल

रायपुर । संतुर वादन भातखंडे ललितकला शिक्षा समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के आज दूसरे दिन पं. शिव कुमार शर्मा का संतुर वादन और पं. उल्हास कलालकर का शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया ।

दोनों नामचीन कलाकारों की सुमधुर प्रस्तुति को संगीत प्रेमियों ने ध्यान से सुना । कालीबाड़ी रोड पर गुरुकूल परिसरमें शाम साढ़े 7 बजे आयोजित उक्त कार्यक्रम में पहले दिन प्रख्यात फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज जोशी द्वारा निर्देशित नाटक चाणक्य का मंचन हुआ । इसे मुंबई के 27 कलाकारों की टीम ने मंचित किया था ।

इसी ंकी में आज शाम पदम विभूषण पं. शिव कुमार शर्मा ने जहां संतुर का कर्णप्रिय वादन प्रस्तुत किया वहीं शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्द फनकार पं. उल्हास कशालकर ने शास्त्रीय गायन पेश किया ।

इस प्रस्तुति में तबला परसंगत करने केलिए मुंबई से पं. योगेश सम्सी और हारमोनियम पर संगत करने के लिए पं. सुधीर नायक विशेष तौर पर आए थे । तबला और हारमोनियम पर संगत करने वाले कलाकार भी काफी अनुभवी थे । सुगम संगीत के रसिकों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

ब्राह्मण समाज की एकता का आव्हान

कोलकाता । ब्राह्मण समाज को एक नई दशा एवं दिशा देने के लिए तीन दिवसीय विप्र महाकुम्भ कार्यक्रम का उद्धाटन राजस्थान के उद्योग मंत्री राजेन्द्र पारीक ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कुम्भ की स्थापना कर किया । समारोह अध्यक्ष गोविन्द नारायण खादीवाले, स्वागताध्यक्ष बनवारी लालसोती एवं राजस्थान ब्राह्मणसंघ के अध्यक्ष राजेन्द्र खम्डेलवाल ने भगवान गणेश, परशुराम एवं वेद माता गायत्री के विग्रह पर पुष्प वर्षा की । कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित डॉ. केदार शर्मा जयपुर, पं. शम्भू शरम लाटा कोलकाता, पं. धनराज पुजारी सालासरएवं पं. पवन पुजारी खाटू श्यामजी ने किया । कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान ब्राह्मण संघ के तत्वावधान में तथा विप्र महाकुम्भ आयोजन समिति की ओर से किया गया। इस मौके पर विभिन्न प्रांतों से आए ब्राह्मण समाज से हजारों लोग उपस्थित थे । यहां भव्यरूप से मंच को सजाया गया है । भारत माता, मां दुर्गा परशुराम, चाणक्य, लक्ष्मीबाई, रामकृष्ण परमहंस आदि की तस्वीरें मंचकी शोभा बढ़ा रही थी ।

मुख्य संयोजक सुशील ओझा ने महाकुम्भ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला । अतिथि के रूप में राजस्थान के परिवहन मंत्री बृजकिशोर शर्मा ने विप्र समाज की एकता का संदेश दिया । कार्यक्रम में आस्ट्रेलिया भौतिक विज्ञानी डॉ. ओम कुमार हर्ष भी मौजूद थे । मौके पर महाराष्ट्र के पूर्वमंत्री राज के पुरोहित, विधायक मोहन जोशी, बिहार के विधायक प्रदीप जोशी ने वक्तव्य रखा । यहां छोटे पर्दे की अंबिका गौड़ बालिका धारावारिक का भी स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन तिवारी ने किया । कार्यक्रम पूर्व पोस्ता गणेश मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली गई । शोभायात्रा में भगवान गणेश, परशुराम, माता तथा भगवान शिव की झांकी निकाली गई । आदिवासियों के वेश में नृत्य भी प्रस्तुत किया । शोभा यात्रा का विभिन्न स्थानों पर लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शोभायात्रा विभिन्न प्रांतों से आए ब्राह्मण सदस्योंके प्रतिनिदि जय परशुराम का नारा लगा रहे थे । छत्तीसगढ़ दल में सांसद श्री गोपाल व्यास, पूर्व मंत्री श्री सत्य नारायण शर्मा, प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री गोविन्द लाल वोरा, समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा के सचिव पी. भानू जी राव, प्रांतीय युवा अध्यक्ष अजय त्रिपाठी, सचिव रामकिशन शर्मा, प्रचार मंत्री सतीश शर्मा, शाकद्विपीय समाज के ट्रस्टी बल्देव शर्मा सहित प्रदेश के अधिकारी व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे ।  read more »

Syndicate content