अभिमान

मानव में अभिमान भरा ।
मानवता में स्नेह भरा ।
जहाँ भरा है अभिमान ।
वहां पड़ा है अभिशाप ।
जीवन ही के ढाल है ।
हाथ एक तलवार हौ ।
दुनिया बड़ा कमाल है ।
मानव बड़ा जलाल है।
राह बड़ा उद्विग्न है ।
कदम बड़ा कठोर है ।
मानव बड़ा निष्ठुर है
कर्म का विस्तार है ।
धर्म का प्रचार है।

संकलनकर्ता- श्रीमती रजनी झा, रायपुर

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