ऋषियों के नेतृत्व में होगी क्रांति-शंकराचार्य

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रायपुर । सूझबूझ से परिपूर्ण सक्रिय राजनेताओं के हाथ में सत्ता की कमान होनी चाहिए । मोटी आमदनी आज राजनीति का पर्याय बन चुकी है । यह देश के लिए कलंक है । आध्यात्मिक ऋषि के मार्गदर्शन में दिशाहीन नेतृत्व को दिशा दें । उक्त बातें गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने समता कॉलोनी स्थित खाटू श्याम मंदिर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही ।

स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता - सत्तालोलुप नेताओं की वजह से राष्ट्र के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है । देश को बचाने के लिए दिशाहीन शासनतंत्र को नियंत्रित करने की आवश्यकता है । दिशाहीन अर्थतंत्र घातक है । भारत का कच्चा माल विदेशों में जा रहा है । रक्षा शिक्षा एवं अर्थतंत्र कूटनीतिज्ञों के हाथ में चली गई है । देश की श्रीहीन होने से बचाने के लिए स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता है ।

गिर रही तीर्थस्थलों की गरिमा - पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि राजस्थान में पिछले कई वर्षों से कृष्ण की लीलास्थली नष्ट की जा रही है ।

टिहरी बांध के निर्माण के बाद से लगातार गंगाजल प्रदूषित होती जा रही है । तीर्थस्थलों की गरिमा लगातार गिर रही है । आज हिन्दुओं की चेतना विलुप्त हो रही है । ऐसी स्थिति में सहिष्णु बनाने वाला शासन तंत्र चाहिए ।

आरोप मुक्त हो संत - संत आसाराम बापू के संबंध में शंकराचार्य ने कहा कि संतों का जीवन आरोपमुक्त होना चाहिए। संतों का जीवन ऐसा होना चाहिए कि शासन ऊन पर आरोप लगाने की हिम्मत न कर सके । संतों को अपना व्यक्तित्व त्याग एवं तपस्या से बनाना चाहिए ।

जहां तक आसाराम बापू का सवाल है मेरी उनसे थोड़े समय की मुलाकात है । उनकी समस्या लेकर कुछ लोग मेरे पास परामर्श के लिए आए थे मैंने उन्हें उचित परामर्श दिया है। मेरी सहानुभूति उनके साथ है ।मैं अपने दायित्व के हिसाब से कार्य अवश्य करूंगा । लोगों को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए कि उनका अपराध अभी सिध्द नहीं हुआ है ।

सारक्षता एवं स्वावलंबन से हल - नक्सलवाद की समस्या पर बोलते हुए शंकराचार्य ने कहा कि नक्सलवाद की समस्या केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं है अपितु यह मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, पं. बंगाल, बिहार आदि राज्यों में भी है । साक्षरता अभियान एवं स्वावलंबन अभियान के अभाव में नक्सलवाद पनप रहा है । शासन तंत्र की नीत िएवं नीयत की वजह से भी यह पनप रहा है । सत्ता पक्ष जब अभियान चला रहा होता है तो विपक्ष टांग खींच रहा होता है। इस तरह से नक्सलवाद कभी नहीं खत्म हो सकता है । इस मुद्दे पर सभी को एकमत होकर कार्यवाही करनी होगी।

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