
दानेश्वर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी में भागवत पुराण लिखा - श्रीमद् भागवत महापुराण की टीका व्याख्या तेलगू, गुजराती, मलयालम , बंगला आदि अनेक भारतीय भाषाओं में हो चुकी है किन्तु छत्तीसगढ़ी में नहीं हुई थी ।
छत्तीसगढ़ अलग प्रदेश बनने तथा छत्तीसगढ़ी को राज भाषा का दर्जा मिलने के बाद भागवत मर्मज्ञ पं. दानेश्वर शर्मा ने छत्तीसगढ़ी में भागवत पुरान दरसन ग्रन्थ लिखना प्रारंभ किया और कठिन साधना के बाद पिछली नवरात्रि में पूरा कर लिया ।
छत्तीसगढ़ी भागवत पुराण - भागवत पुरान दरसन ग्रन्थ महत्वपूर्ण ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए पुरी धाम पीठाधीश्वर जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती ने अपना आशीर्वाद प्रदान करते हुए लिखा है कि श्री दानेश्वर शर्मा ने रोचक शैली में श्रीमद् भागवत पुराण दर्शन लिखकर क्षेत्रीय महानुभावों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है ।
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