55. ऊँ वायुपुत्राय नम:
56. ऊँ रुद्राय नम:
57 ऊँ अनघाय नम:
58 ऊँ अजराय नम:
59. ऊँ अमृत्यवे नम:
60 ऊँ वीरवीराय नम:
61 ऊँ ग्रामवासाय नम:
62 ऊँ जनाश्रयाय नम:
63. ऊँ धनदाय नम:
64.ऊँ निर्गुणाय नम:
65.ऊँ कायाय नम:
66. ऊँवीराम नम:
67 ऊँ निधिपतये नम:
68 ऊँ मुनये नम:
69 ऊँ पिङ्गाक्षाय नम:
70 ऊँ वरदाय नम:
71. ऊँ वाग्मिने नम:
72.ऊँ सीताशोकविनाशनाय नम:
73.ऊँ शिवाय नम:
74. ऊँ शर्वाय नम:
75.ऊँ पराय नम:
76. ऊँ अव्यक्ताय नम:
77. ऊँ व्यक्तव्यक्ताय नम:
78. ऊँ रसाधराय नम:
79. ऊँ पिङ्गïकेशायनम:
80. ऊँ अव्यक्तायनम:
81. ऊँ श्रुतिगम्यायनम:
82. ऊँ सनातनाय नम:
83. ऊँ अनादये नम:
84. ऊँ भगवते नम:
85. ऊँ देवायनम:
86. ऊँ विश्वहेतवे नम:
87. ऊँ निराश्रयाय नम:
88. ऊँ आरोग्य कत्र्रे नम:
89. ऊँ विश्वेशाय नम:
90. ऊँ श्विनायकाय नम:
91. ऊँ हरीश्वराय नम:
92. ऊँ भर्गाय नम:
93. ऊँ रामायनम:
94.ऊँ रामभक्ताय नम:
95. ऊँ कल्याणाय नम:
96. ऊँ प्रकृतिस्थिराय नम:
97. ऊँ विश्वम्भराय नम:
98. ऊँ विश वमूर्तये नम:
99. ऊँ विश्वाकाराय नम:
100. ऊँ विश्वदाय नम:
101. ऊँ विश्वात्मने नम:
102. ऊँ विश्वसेव्याय नम:
103. ऊँ विश्वाय नम:
104. ऊँ विश्वहराय नम:
105. ऊँ रवये नम:
106. ऊँ विश्वचेष्टाय नम:
107. ऊँ विश्वागम्याय नम:
108. ऊँ शाकिनीजीवहराय नम: ।
श्री सूर्य मंत्र । सूर्य आरती । सूर्य पूजा । सूर्य वंदना । श्री सूर्य वंदना । सूर्य अराधना । श्री सूर्य अराधना । सूर्य अर्चना । श्री सूर्य अर्चना । सूर्य नमस्कार । श्री सूर्य नमस्कार । सूर्य प्रार्थना । श्री सूर्य प्रार्थना । छठ । छठ पूजा । छठ सूर्य । सूर्योपासना । सूर्य उपासना । श्री सूर्य उपासना । श्री सूर्योपासना ।
जय कश्यपनन्दन, ऊँ जय अदितिनन्दन ।
त्रिभुवन-तिमिर-निकन्दन, भक्त हृदय चन्दन ।
सप्त- अश्व-रथ-राजित, एक चक्रधारी ।
दु:खहारी सुखकारी, मानस- मलहारी ॥ 2 ॥
सुर-मुनि- भूसुर वंदित, विमल विभवशाली
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरणमाली ॥3॥
सकल-सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी ।
विश्व-विलोचन मोचन भव बन्धनहारी ॥4 ॥ read more »
गुजराती ब्राह्मण समाज रायपुर द्वारा प्रतिवर्षानुसार अपने रक्षाबंधन पावन पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार एवं बह्मभोज का आयोजन किया । क्षत्रीय जातीय सेवा समिति धर्मशाला में ब्रह्म समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और श्रावणी पूजा विधान के अनुसार संपन्न कर अपने धारण किये हुए जनेऊ को परिवर्तित किया । read more »
शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी, इसीलिए इस दिन किया गया शिव पूजन, व्रत और उपवास अनंत फल दायी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रध्दालु भक्त अपनी राशि के अनुसार भी भगवान शिव की आराधना और पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं । महाशिव रात्रि के दिन किसी भी राशि का जातक पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक कर सफेद अर्क के फूल चढ़ाकर चंदन से प्रणव (ॐ) बनाकर भी उपासना कर सकते हैं ।
तिल स्नान कर करें शिव पूजा- फागुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिव रात्रि महोत्सव मनाया जाता है । त्रयोदशी को एक बार भोजन करके चतुर्दशी को दिन भर अनन नहीं ग्रहण करना चाहिए । इसके अलावा यह भी मान्यता है कि काले तिलों से स्नान करके रात्रि में विधिवत शिव पूजन करना चाहिए । भगवान शिव के सबसे प्रिय पुष्पों में कनेर, बेल पत्र तथा मौलसिरी है । लेकिन पूजन विधान में बेलपत्र सबसे प्रमुख है । शिवजी पर पका आम चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होता है । read more »
Chhattisgarh Rath Yatra Paricharcha - Shri Jagannath Internet Manas Pooja - On the occassion of Raipur Rath Yatra 2009 falling on 24 June 2009 a unique discussion is being organised to augment Internet world with blessings of almighty Lord Jagannath who is the only God which comes out every year on Rath Yatra to provide holy glimpse to devotees.
Raipur Rath Yatra Video Shri Jagannath Rath Yatra 2009 Raipur Sadar Bazar and Raipur Jagannath Mandir Video Gayatri Nagar Jagannath Mandir
Shri Jagannath Mandir Raipur read more »
इस दिन ब्रम्ह मुहूर्त में स्नान कर घर के दरवाजे पर या पूजा के स्थान पर गोबर से नाग बनाया जाता है। दूध, दुबी, कुशा, चंदन, अक्षत, पुष्प आदि से नाग देवता की पूजा की जाती है लड्डू और मालपुआ का भोग बनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सर्प को दूध से स्नान कराने से सांप का भय नहीं रहता ।
पंडितों का कहना है कि जिनके कुंडली में कालसर्प का योग रहता है उसे विशेषकर इस दिन नागदेवता की पूजा करनी चाहिए। भारत के अलग=अलग प्रांत में इसे अलग=अलग तरह से मनाया जाता है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और बंगाल में इसे विशेष रूप से मनाया जाता है। read more »
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