ब्राह्मण एक ऐसे निर्धन व्यक्ति की संज्ञा है, जिसे मुद्रा पर नहीं, अपितु विद्या पर आस्था है । यही उसका सर्वोत्तम आदर्श है । ब्राह्मïण के लिए तो भिक्षा ही धन है । आदिकाल से ब्राह्मïण भिक्षा पर जीने का विश्वासी रहा है । जगन्नाथ महाप्रभु ने अपने ब्राह्मïण भक्त की श्रद्धा पर रीझते हुए जो संस्कार दिया । उसका सार है - ब्राह्मण मुझे मो आहार । लक्ष्मी को ब्राह्मïण के घर आनंदानुभूति कहां होती है ।
ब्राह्मण निर्धन हुआ तो क्या हुआ, एक वही है जो पवित्र पैतृकता में जन्म लेता है, पवित्र आचरण करता है,यश कमाता है और लोगों को पाठ पढ़ाकर उन्हें पूर्णता की ओर उन्मुख करता है । वह सनातन परंपरा का संपोषक रहा है। सोलह संस्कारों का साक्षी एवं संचालक । ब्राह्मïण होने का मतलब सूर्य बनना है, जिसके उदय होते ही रात की कलुषताओं का रंग विलीन हो जाता है । ब्राह्मïण होने का अर्थ सामाजिक परिसरों का शुद्धीकरण है, जहां न प्रतिशोध के लिए जगह है और न ही दमन के लिए, ब्राह्मïण का आशय है विशाल समुद्र है जो कभी नहीं घटता है । सदा से ही ब्राह्मïण का धर्म और कर्म कुव्यवस्था के विरूद्ध संघर्ष को दिशा देना रहा है । तभी तो ज्ञान, चेतना, विद्या, वाणी तथा अभिव्यक्ति का पवित्रतम् उत्तरदायित्व उसके नाम है ।
राजा को ही भुसूर नहीं कहा जाता, ब्राह्मïण ही भुसूर कहलाते हैं । ब्राह्मïण बिना राजा के रह सकता है, किन्तु एक राजा ब्राह्मïण के बिना कदापि नहीं । ब्राह्मïण सर्वथा, सर्वदा शांति का पुजारी रहा है । वह समाज के सभी वर्गों एवं वर्णों की प्रसन्नता के लिये गीत गाता रहा है । जो समय आने पर आयुध भी धारण कर लेता है । वह चाणक्य बनकर नंदवंश की यातना सेप्रजा को मुक्ति दिलाने में भी पीछे नहीं हटता । वह ब्राह्मïण ही है, जो कभी द्रोणाचार्य बनकर कौरव वंश को समूल नष्टï करने का गुरू मंत्र पांच पांडवों को देता है । कभी वह अश्वत्थामा बनकर युद्ध की रणभेरी बजाता है, तो कभी वह परशुराम बनकर विध्नकारी शक्तियों को नामोनिशान मिटा देता है ।
ब्राह्मण पंडित है और पांडित्य उसकी पहचान । वह अग्रजन्मा है, इसलिए वह सभी भाईयों का मार्गदर्शक भी है । वह द्विज है, इसलिए उसे दुनिया के अनुभवों का दोहरा लाभ प्राप्त होता है । ब्राह्मïण सर्वश्रेष्ठï विद्यार्थी है और सर्वश्रेष्ठï प्राध्यापक भी । हमारी खुबिया हमारी पहचान है । हमारे युवा आज के इंटरनेट मोबाईल युग कर लो दुनिया मुी में के विपरीत दुनिया के मुी में समाते जा रहे हैं । एक ब्राह्मïण चाणक्य एवं एक परशुराम बनकर सम्पूर्ण समाज का उद्धार किया करता था, पर आज हम भीड़ में गुम होते जा रहे हैं । read more »
छत्तीसगढ़ राज्य की उर्वरा भूमि पर विप्र वार्ता का जन्म चार वर्ष पूर्व सर्वाधिक शुभ एवं अगणनीय मूहूर्त पावन अक्षय द्वितीया के दिन हुआ, पचासवां अंक आपके हाथों में सौंपते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है । इस अवसर पर आप सभी का साधुवाद करते हुए धन्यवाद देता हूं एवं साथियों को शुभकामनाएं ।
आदिकाल से ब्राह्मïण ऋषि, परमेश्वर का सेवाधर्म पालक एवं द्योतक रहा है । विशिष्टï दृष्टिï रखने वाले व्यक्ति को ऋषि कहा जाता है वेदों के अनुसार वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मïण को मनुष्य के शरीर में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था वो मस्तिष्क माना जाता है , भारतीय परम्परा में बह्मï के खोज करने वाले ज्ञानी को ब्रम्हर्षि कहा गया । ब्रह्मïर्षि का कार्य शास्त्र का विकास करना था । ऋषियों ने यक्ष रूपी विचारों को जागृत कर लोक चेतना तक पहुंचाने का कार्य कुशलतापूर्वक किया है । ऋषि चिंतनशील सेवाभावी, वाणी का लोक कल्याण में उपयोग करते थे इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय संस्कृति त्याग, तपस्या और सहनशीलता की पहचान है । ब्राह्मïण ने सदैव चाणक्य और परशुराम के रूपमें लोक कल्याण के लिए ही शस्त्र और शास्त्रों का प्रयोग किया है । read more »
ब्राह्मण प्रतिभाओं का वैज्ञानिक अध्ययन
रायपुर । पं. रविशंकर शुक्ल वि. विद्यालय द्वारा प्रियंका वर्मा को छत्तीसगढ़ के संग्रहालयों में संग्रहित ब्राह्मण प्रतिमाओं के वैज्ञानिक अध्ययन विषय पर पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई ।
प्रियंका वर्मा ने अपना शोध कार्य प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययन शाला के प्रो. एल. एल. निगम के निर्देशन में पूर्ण किया । read more »
गढ़मुक्तेश्वर 16 मई 2010 - भगवान परशुराम जयंती के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय ब्राह्मण युवा संगठन द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसकी सदस्यता पं. गजेन्द्र शर्मा (प्रवक्ता) ने की गोष्ठी में मुख् अतिथि राम मनोहर लोहिया इण्टर कॉलेज गढ़मुक्तेश्वर के प्रधानाचार्य श्री डॉ. मूलचंद दीक्षित तथा संगठन के प्रदेश संयोजक डॉ. हर्षवर्धन शर्मा ने भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित करते हुये माल्यार्पण किया तथा वक्ताओं ने भगवान परशुराम के जीवन पर प्रकाश डालते हुये ब्राह्मणों से संगठित होकर राष्ट्र रक्षा का संकल्प लिया। read more »
कोलकत्ता ब्राह्मण सम्मेलन 2010
कोलकत्ता ब्राह्मण सम्मेलन 2010 - 2
कोलकत्ता ब्राह्मण सम्मेलन 2010 - 3
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