आतंकरूपी रावण के लिए आज राम की आवश्यकता
रावण शब्द से ही एक आतंकवादी, आततायी सताने वाले आदमी का चेहरा सामने आ जाता है । रावण पंडित था साथ मे ंपरम प्रतापी, दुस्साहसी, वैज्ञानिक , औषधियों का ज्ञाता, वेदों का जानकार, महत्वाकांक्षी, कूटनीतिज्ञ था पर अत्याचार के कई रूप उसमें समाहित थे । वह तकनीकी ज्ञान का विशेषज्ञ था । सर्वगुण संपन्न होने पर भी वह अपनी लिप्सा के आधीन था । वह नहीं चाहता था कि विश्व में ब्रम्हाण्ड में कोई उसकी बराबरी कर सके, उससे टक्कर ले सके । अपने बलबूते से कई सिध्दियां, तपस्या से कई वरदान प्राप्त कर अजेय बन चुका था । जब उसे आभास होता था कि कोई उससे शक्ति में और विज्ञान में आगे जाने वाला है तभी वह उसके विनाश का उपक्रम कर नष्ट कर देता था । नवग्रह, कई देवी देवता, उसेक यहां बंदी बनकर रहे थे । इसी तरह आज के आतंकी, आकाओं की महत्वाकांक्षाएं भी है ।
रावण भारत खंड से बहुत ही आतंकित रहता था । यहां तपस्वी , वीर वैज्ञानिक, वैद्य सभी तरह की शक्तियों के ज्ञाता रहते थे पर ये योध्दथा लड़ाका नहीं थे । कई ऋषियों के पास अस्त्र- शस्त्रों की शक्तियां थी उनके प्रयोग मानव हित के लिए होते थे । मुनियों ने शब्द शक्ति को प्राणवान, उर्जावान, बनाया । मंत्र बल की सिध्दियों से सक्षम बने परंतु अकेला एक रावण अपने पास इतनी सिध्दियां, शस्त्र शक्ति समेटे हुए था कि वे सब उसके सामने तुच्छ थे ।
समय के इस कालखंड को मनीषियों ने त्रेतायुग का नाम दिया है । इस समय अयोध्या में राजा दशरथ के यहां चार पुत्रों का जन्म हुआ । बचपन से ही राम की प्रतिभा, कौशल का दर्शन दिखाई देने लगा था । विद्या पाने के लिए उस समय के सर्वगुण संपन्न गुरू वशिष्ठ से शिक्षा पाई । जहां से तपकर निकले तथा राजनीति, समाजशास्त्र रण कौशल के सात युध्द विद्या की बारीकियों को समझकर अयोध्या आये । तब तक उनके कौशल, व्यावहारिकता और शौर्य की गाथाएं चहुं ओर फैल चुकी थी । ऋषि मुनि, महात्माओं आदि की नजर राम पर ठहर गई ।
मुनि विश्वामित्र के यज्ञों के रावण के आतंकी ताड़का, मारची, सुबाहु जैसे राक्षक ध्वंस कर रहे थे ऐसे में धैर्यवान, शौर्यवान गुणवान योध्दा राम व लक्ष्मण ने राक्षसों को मारकर, खदेड़कर यज्ञ की रक्षा की । यह राम की पहली परीक्षा था । अब बारी आती है राम के राजतिलक की । रावण की शक्ति के विनाश की चाह रखने वालों को लगा कि यदि राम का राजतिलक हो गया तो राक्षसों (आतंकियों) का विनाश कैसे होगा ? अयोध्या के महल की कमजोरी कड़ी मंथरा के माध्यम से कैकेयी को साध्य बनाकर राम का वन गमन करवाया गया। राम को वन में ऋषि भारद्वाज से मार्गदर्शन मिला । अगस्त मुनि से अक्षय तरकस वाला दिव्य धनुष मिला व अन्य शक्तियां मिली ।
इसी तरह श्रीराम को प्राप्त शक्तियों और सहयोगी आयुधों ने अति शक्तिमय बना दिया । राम साहसी वीर योध्दा थे । इन शक्तियों द्वारा ही रावण का विनाश करने में सफल हुए । इसी तरह आज के आतंकरूपी रावण को मारने के लिए एक राम बनाना होगा , जिसके पास इस आतंक को मिटाने हेतु सभी तरह की शक्तियां, भौतिक, चारीत्रिक, साहसिक के साथ आधुनिक विज्ञान की उपलब्धियों , जिनसे युध्द लड़ा जा सके, प्राप्त करना होगा ।
अजय त्रिपाठी, ब्लाग जर्नलिस्ट
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