फरवरी-2007

वधू का सोलह श्रृंगार

पांचवा श्रृंगार - शादी का जोड़ा : उत्तर भारत में आम तौर से शादी के वक्त दुल्हन के काम से सुसज्जित शादी कातकाजा गलग जोड़ा (घाघरा, चोली और ओढ़नी) पहनाई जाती है । इसी तरह महाराष्ट्र में हरा रंग शुभ माना जाता है और वहां शादी केवक्त वक्त दुल्हन हरे रंग की साड़ी महाराष्ट्रियन शैली में बांधती है ।

छठा श्रृंगार - गजरा : दुल्हन के जूड़े में जब तक सुगंधित फूलों कालाल रुद्मल न लगा हो तब तक उसका श्रृंगार फीका सा लगता है ।

सातवां श्रृंगार - मांग टीका : मांग के बीचों-बीच पहना जाने वाला या स्वर्ण आभूषण सिंदूर के साथ मिलकर वधू की सुंदरता में चार चांद लगा देता है । ऐसी मान्यता है कि नववधू कोजरी टीका सिर के ठीक बीचों बीचा इसलिये पहनाया जाता है कि वह शादी के बाद हमेशा अपने जीवन में सही और सीधे रास्ते पर चले और अपने जीवन में वह हमेशा बिना किसी पक्षपात के सही निर्णय ले सकें ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

विप्रबंधु कृपया ध्यान दें

विप्र-वार्ता का अंक निरंतर पाठकों को मिल रहा है । वर्तमान में कुछ स्थानों से विप्र-वार्ता के नाम से अन्य व्यक्तियों द्वारा कुछ चंदे की रकम प्राप्त करने का समाचार जानकारी में आया है ।

पाठकों से अपील है कि विप्र-वार्ता के अधिकृत व्यक्तियों के पास विप्र-वार्ता की सदस्यता की प्रिंटेड रसीद है जिसमे रकम 151/- त्रिवार्षिक प्राप्त करना छपा है को ही प्राप्त कर सदस्यता शुल्क प्रदान करें एवं च्रद्रा प्राप्त करने हेतु भी विप्र-वार्ता की बिना रसीद किसी प्रकार का चंदा न दें । साथ ही यह भी पत्रिका से स्पष्ट कर लें कि संबंधित का नाम विप्र-वार्ता के प्रथम पेज पर प्रकाशित सूची में शामिल है कि नहीं ।

विशेष जानकारी के बतौर समूचे छत्तीसगढ़ में प्रतिमाह वर्तमान में वितरित पत्रिका के 2000 से भी ज्यादा प्रतियों के एवज में हमारे द्वारा कुछ ही विप्रजनों से सदस्यता प्राप्त की गई है ।  read more »

आजादी से बड़ा नहीं पद्मश्री - डॉ. पाण्डे

सरल, सौम्य और सहज व्यवहार के धनी श्रीपाण्डे को इस वर्ष केन्द्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार देने का निर्णय लिया है । इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वे कहते हैं कि यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि कतई नहीं बल्कि आजादी मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि रही । राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिम्हन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने डॉ. पांडे को बधाईयां दी तथा शिक्षा और साहित्य में दिये उये उनके योगदान को सराहा ।

आजाद चौक निवासी प्रसिध्द आयुर्वेदाचार्य डॉ. महादेव प्रसाद पांडे जीवन के 79 बसंत देख चुकी इस शख्सियत ने पुरस्कार के लिये चयनित होने पर प्रतिक्रिया दी अच्छी चीज हर उम्र में अच्छी लगती है लेकिन पद्मश्री सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं है बल्कि आजादी है अंचल के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में से एक श्री पांडे ने बचपन से ही संघर्ष किया जब13 वर्ष के थे तभी गांधी जी के आंदोलन से प्रेरित होकर जेल चले गये । 1953 से 70 तक आयुर्वेद महाविद्यालय में लेक्चरर, रीडर और प्रोफेसर के नाते कार्य करते रहे । उसके बाद कई वर्षो। तक वे जबलपुर और रायपुर आयुर्वेद कालेज में प्राचार्य के पद पर भी रहे ।

पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे गये शहर के प्रसिध्द आयुर्वेदाचार्य डॉ. महादेव प्रसाद पांडे की धर्मपत्नी आयुर्वेदाचार्य डॉ. करुणा पांडे, जो कि छत्तीसगढ़ की पहली महिला वैद्य हैं कहती हैं - यह पुरस्कार तो बहुत पहले मिलना था ।  read more »

Hemant Tiwari's picture

माघ - मड़ई मेंलों का महीना

उत्सवधर्मिता हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रही है । छत्तीसगढ़ की संस्कृति में मड़ई मेलों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है । यहां पर स्थानीय जनभावना के अनुरुप मेलों-मंड़ईयों का आयोजन होता है ।

छत्तीसगढ़ की संस्कृति विविध रंगों से रंगी हुई हैं वह लोक जीवन की अनगढ़ शैली में कल-कल, छल-छल निनाद करती हुई बहती है । मड़ई शब्द सुनते ही एक ऐसा दृश्य आंखों के सामने आता है, जिसमें गायन वादन के साथ घुंघरुओं की आवाज, तेज पदचाप, विविध ग्राम देवताओं के प्रतीकात्मक झंडे, जो झालरों की तरह बांस के उपरी भाग में बंधे होते हैं, सब कुछ समाहित होता है ।

तरह-तरह की श्रृंगार की वस्तुएं जैसे चूड़ीपाट, फंदड़ा, रंगी-बिरंगी टिकुली, झाबा, कान, हाथ और पैर के आभूषण, चटख रंगो वाली साड़ियां, गमछे, रंगीन कुर्ते, बैलों का घांघरा, बर्तन-माड़ा, साग-भाजी, मिट्टी के बने खिलौने, बांस की टोकनियां और मस्ती में झूमते युवक-युवतियां वृध्द और चकित बालवृंद सब यहीं मिल जाते हैं । राउत नाचा से लेकर सारे ग्रामीण खेल जैसे गुल्ली डंडा, फुगड़ी, खो-खो और भौंरा-बांटी आदि सब आंखों के सामने तैरने लगते है ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

श्रध्दा का उमड़ेगा सागर

महानदी, पैरी तथा सोंढूर के त्रिवेणी संगम की बालू को अभी से इंतजार है उन संत, महात्माओं के चरण का । जिनके स्पर्श से राजिम की धरती भी पावन हो उठेगी । छत्तीसगढ़ का यह प्रयागराज राजिम अपनी सांस्कृतिक विरासत के साथ गौरवशाली वर्तमान का भी साक्षी बनेगा । जब लाखों लोग एक साथ पवित्र स्नान करेंगे तो पूरा माहौल ही बदल जाएगा । छत्तीसगढ़ की समृध्दशाली धार्मिक, सांस्कृतिक परंपरा की पहचान बन चुके राजिम मेले को और भी भव्यता देने में प्रशासन जुट गया है । माघी पूर्णिमा पर पवित्र स्नान के साथ ही प्रति वर्ष महाशिवरात्रि तक राजिम मेला महापर्व अनादिकाल से मनाया जाता रहा है । राजिम के त्रिवेणी संगम में काशी और जगन्नाथपुरी जैसा पंचकोशी धाम का विधान है ।

त्रिवेणी संगम पर स्नान, दान और तर्पण के पश्चात् ईश्वरीय कृपा मिलने के जन विश्वास, श्रध्दा तथा आस्था को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से वर्ष 2005 में संत-समागम का आयोजन राजिम मेला के अवसर पर किया गया । इस संत-समागम में साधु-संतो ने राजिम कूंभ महापर्व आयोजन के लिए आशीष प्रदान किया ।

2006 में राजिम मेला के अवसर पर हजारों साधु-संतों ने समवेत स्वर में राजिम कूंभ की मान्यता दी । संत-महात्माओं का मानना है कि जहां संत-समागम होता है वहां उनकी वाणी से अमृत बरसता हैं ऐसे आयोजन को कुभ पर्व कहने की परंपरा है । राज्य द्वारा राजिम कूंभ आयोजन को भव्य और गरिमामय बनाने की दृष्टि से राजीवलोचन कूंभ अधिनियम विधानसभा में पारित कराया गया ।  read more »

Shailendra Sharma's picture

जीवन दर्शन

इलाहाबाद हाईकोर्ट के भूतपूर्व चीफ जस्टिस एम एन शुक्ला अच्छे स्वास्थ्य और स्मृति का आनंद लेते हैं। जबकि वो 82 वर्ष से अधिक हो चुके हैं । पांच दस दशक पहले कुछ उच्च पद पर प्रतिष्ठित द्वारा कहे गए वाक्य द्वारा वह तुम्हें अत्यंत प्रभावित कर सकता है यदि इस चकित कर देने वाली विस्मृति के बारे में पूछने पर वह विनम्रता से इसका श्रेय गायत्री जाप, योग और प्रार्थना को देते हैं । वह हाईकोर्ट जज बनने से पहले गायत्री मंत्र प्रांरंभ किया था । और सेवानिवृत्ति के बाद अपना अधिकतर समय प्रार्थना को देने लगे । वह दावा करके कहते हैं कि वह ईश्वर की कृपादृष्टि से ही जीवन के प्रत्येक पल का आनंद लेते हैं ।

स्व. प्रेमनारायण शुक्ल के पुत्र कानपुर के प्रतिष्ठित अधिवक्ता, जस्टिस शुक्ला अपने जीवन के प्रत्येक दिन को कानपुर में बिताया । वह अपने हाई स्कूल को डीएवी स्कू ल से प्रथम श्रेणी में पास किया । और उनकी विशिष्ट उपलब्धि अंग्रेजी विषय में विशेष योग्यता प्राप्त करना था । बाद में उन्होंने अपना इंटरमीडियट कानपुर के प्रतिष्ठित बीएनएसडीकॉलेज से किया ।

वह कहते हैं कि यह मेरे जीवन का सर्वोत्तम क्षण था और बीएनएसडी कालेज भविष्य कैरियर का मेरा प्रारंभ था । मेरे कालेज में एक पार्लियामेंट था और मैं वहां स्पीकर चयनित हुआ और मुझे कालेज के सभी कार्यक्रमों की अध्यक्षता का अधिकार था और देश के महान व्यक्तियों से मिलने का मौका मिला जिसमें डॉ. राधाकृष्णन, सरोजनी नायडू, डॉ. हृदयनाथ कूंजरु, डॉ. अमरनाथ झा और पं. माखनलाल चतुर्वेदी ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

सूर्य सप्तमी यज्ञ एवं भंडारा संपन्न

शाकद्वीपीय ब्राह्मण समाज के द्वारा स्थानीय अंबा देवी मंदिर स्थित प्रागंण में सूर्य सप्तमी के अवसर पर यज्ञ एवं भंडारा संपन्न हआ । प्रात:8 बजे सूर्य हवन-पूजन के पश्चात यज्ञ प्रारंभ हआ । दोपहर को पूर्णाहुति के पश्चात् भंडारा में समस्त सामाजिक बंधु शामिल हुए । इस अवसर पर समाज के प्रमुख सदस्य श्री बिहारीलाल जी शर्मा, हजारीमल शर्मा, लक्ष्मीनारायण शर्मा, बुलाकीलाल शर्मा, सुरेंद्रनारायण शर्मा, अध्यक्ष बलदेव शर्मा, दिलीप शर्मा सहित अनेक गणमान्य नागरिक महिलाएं एवं बच्चे उपस्थित थे ।

Dhananjay Tripathi's picture

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ व्रतबंध

समता सोसायटी प्रांगण में छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति द्वारा आज सामूहिक व्रतबंध समारोह का आयोजन किया गया । यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ25 ङ्खह्न बटुकों का व्रतबंध संपन्न हुआ । पूर्ण ब्र्राह्मणत्व प्राप्ति के लिए जनेउ धारण समारोह मे बच्चों के साथ ही परिजन उत्साह के साथ पहुंचे । शुभारंभ भगवान परशुराम तथा माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ । वैदिक धार्मिक परम्परानुसार मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, बटुकों का पूजन, मुंडन, जनेउ धारण कराया गया । यहां माहौल शादी जैसा रहा ।

बच्चों को ठीक उसी तरह हल्दी लगाई जिस तरह शादी के मौके पर लगाई जाती है । बटुकों की माताएं इस कार्य में जुटी हुई दिखाई पड़ी । यहां मुख्य जजमान बिहारीलाल शर्मा व धर्मपत्नी सुनीता शर्मा थी ।

कार्यक्रम के मुख्य पंडित ओमप्रकाश शर्मा थे । संचालर्नकत्ता प्रांताध्यक्ष डॉ. प्रकाशनारायण शुक्ला, ललित मिश्रा, बोधन पांडे, राजेश शर्मा, सतीश शर्मा, अशोक शर्मा, सुरेन्द्र शुक्ला, मंजू शर्मा, धनंज य त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, रमादेवी शर्मा, नीरजा शर्मा, भारती शर्मा, डॉ. संध्या तिवारी, सतानंद शर्मा, रामविशाल शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

बृजलाल द्विवेदी पत्रकारिता सम्मान इंदौर के डा. व्यास को

रायपुर । पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान 2006 देश की सर्वाधिक प्राचीन मासिक पत्रिका वीणा के संपादक डा. श्यामसुंदर व्यास को प्रदान किया गया है । अक्टूबर 1927 से इंदौर से संतत प्रकाशित होने वाली वीणा के 80 वर्ष के साहित्यिक योगदान के लिए इस सम्मान के लिए चुना गया है । जिसके डा. व्यास पिछले 35 सालों से संपादक है ।

3 सितंबर 1927 को इंदौर में जन्म डा. श्यामसुंदर व्यास शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय इंदौर से आचार्य पद से 1987 में सेवानिवृत्त हुए हैं । 35 वर्षों से वीणा का संपादन करने के अलावा उन्होंने शोधार्थियों का निर्देशन, लेखन किया है । उपन्यास, व्यंग्य, कहानी, लघुकथा, नाटक, समीक्षा समेत हिंदी की सभी विधाओं में उनकी लगभग 26 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है ।

पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से पहले डा. व्यास साहित्य वाचस्पति, भारत भाषा भूषण, साहित्य भूषण और अक्षरादित्य जैसे पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके हैं।  read more »

कलियुग के महात्मा

शूद्र द्वि जन्ह उपदेश दे ग्याना ।
मैली जनेउ लेहि कुशना॥

शुद्र महात्मा ब्राह्मणों को ज्ञान का उपदेश देता है और गले में जनेउ डाल कर दान लेते हैं ।
गुरु शिष्य अधिक अंध का लेखा
एक न सुनई एक न देखा ।
हरई शिष्य धन शोक न परई ॥

गुरु ज्ञान के अंधे है और शिष्य कानों से बहरे हैं गुरु शिष्य को उपदेश देते हैं तो शिष्य सुनता ही नहीं । गुरु शिष्य से धन लेता है परंतु शिष्य ज्ञान उपदेश से वंचित रह जाता है ।

वर्नाधम तेली कुम्हारा ।
स्वपठ की रात कौन कलवारा ।  read more »

Syndicate content