संस्कार विहीन होता भारतीय समाज

गौरवमयी हिन्दू समाज आज अपने वैदिक संस्कारों को खो करके दिग्भ्रमित हो रहा है तथा समाज की मान मर्यादाओं को भूलता जा रहा है । उसे अपने ॠषि मुनियों के दिखाये मार्ग पर विश्वास नहीं हो रहा है तथा उसे पाखण्ड एवं दकियानूसी कह करके अपनी विरासत को छोड़ करके दूसरे धर्मों की संस्कृतियों की बैशाखियों के सहारे उन्नति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं । जबकि अन्य देश के नागरिक शान्ति सुख समृध्दि का मार्ग भारत की संस्कृति में खोज रहे हैं ।

किसी भी राष्ट्र का भविष्य वहां की युवा शक्ति के कंधो पर होता है । जिस देश ने विश्व को वसुधैव कुटुम्बकम, सर्वे भवन्तु सुखिन का रास्ता दिखाया है आज उसी देश का युवा वर्ग संस्कार विहीन हो करके पाश्चत्य सभ्यता की ओर आर्कषित रहा है । अपने पुर्वजों के संस्कारों (आदर्शों) को तिलांजलि देकर के आधुनिकता के भौतिकवाद को ग्रहण किया जा रहा है । ये प्रवृत्ति देश के भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं है ।

आज युवाओं में आदर्श संस्कारों की मिटती प्रवृत्ति के लिए पारिवारिक परिवेश ही ज्यादा उत्तरदायी है यदि बाल्यावस्था से ही मां बाप तथा गुरूजन भारतीय संस्कृति तथा वैदिक संस्कारों पर ध्यान देते तथा इनकी महत्ता को बतलाते । तो आज युवा पीढ़ी दिग्भ्रमित नहीं होती । हम अंग्रेजी अनिवार्य मानकर उस ओर उन्हें ढकेल रहे हैं ।

आज हमारे देश में जिस प्रकार से विदेशी संस्कृति तेजी से अपने पैर फैला रही है उसी का परिणाम है कि परिवेश का यह प्रभाव रिश्ते, नाते, सामाजिक बंधन, गुरू शिष्य का संबंध भी कलंकित हो रहा है। आज समाज में प्रेम, भाईचारा, परोपकार , नम्रता, शिष्टाचार , सहानुभूति , सत्यता का नितान्त अभाव हो रहा है ।

समाज में अस्थिरता का वातावरण, जातिवाद, आरक्षण, समरसता का अभाव असंतोष का वातावरण समाज में चारो ओर व्याप्त है । ये सभी संस्कार विहीनता के ही परिणाम है । आज हममे राष्ट्रीय भावना का भी नितान्त अभाव हो रहा है । इन सबमें सुधार करने की जिम्मेदारी हमारी है । इसलिए हम आगे आये और प्रदेश के युवाओं के समक्ष न केवल मिसाल रखें बल्कि इनका प्रचार प्रसार और संदेश पहुंचाकर कार्य परिणिती की जिम्मेदारी हमारी है । तभी भारतीय समाज का पुराना स्वरूप संस्कार वान नागरिक का निर्माण हो पायेगा ।

- राजीव चक्रवर्ती संपादक

Comments

Hindu Indian society is being devoid of values

Proud Hindu society today is loosing it's own Vedic culture leading to being confused and is continue to forget the value and dignity of society. It does not believe the path shown Hindu's own Rishi Muni (saints).

Hindi Samaj is saying the great paths by Hindu saints as hypocrisy and orthodox. It is leaving Hindu legacy and paving the way of growth with support of other religions and cultures.

While citizens of other countries are looking for the path of peace happiness and prosperity in the culture of India.

Rajiv Chakavorty has wonderfull point in the global people being inspired and adopting Hindu Indian heritage and Hindu Culture of India while Hindu are moving away from it

Sanskarvihin hota bhartiya samaj

Shree Rajivji ke vichar jab hum 60 varsh ke vyaktiyon ko jajhkorne ka karya kar sakte hain to yuva piri ko chintan karne ko vivash kyun nahi karenge? Charitra nirman v deshbhakti ke sanskar mata-pita v samaj se grahan kiye jate hain.Pahle mata-pita ki soch badalne ki avsyakta hai. Bhautikvad v bazarvad aaj pure vishva kee jaroorat ho gai hai, prantu bina sanskar v dharam ke yeh sab kuch vyarth hai.
kripya muje bhee vipra-varta ka sadasya bnaiye. Dhanyavad sahit.

Vinayak Sharma
President,Brahman Sabha,Pandoh.Distt. MANDI (H.P.)
Kshetriya Prabhari, Himanchal Pradesh Brahman Sabha.

Hindi Added By Vipra -

श्री राजीव जी के विचार जब हम 60 वर्ष के व्‍यक्तियों को झकझोरने का कार्य कर सकते है तो युवा पीढ़ी को चिंतन करने को विवश क्‍यों नहीं करेंगे ?

चरित्र निर्माण व देश भक्ति के संस्‍कर माता-पिता व समाज से ग्रहण किये जाते हैं।

पहले माता-पिता की सोच बदलने की आवश्‍यकता है।

भौतिक वाद व बाजार वाद आज पूरे विश्‍व की जरूरत हो गई है, परंतु बिना संस्‍कार व धर्म के यह सब कुछ व्‍यर्थ है।
कृपया मुझे भी विप्र वार्ता का सदस्‍य बनाए।
धन्‍यवाद सहित
विनायक शर्मा
अध्‍यक्ष, ब्राह्मण सभा, पंडोह जिला, मंडी, हिमाचल प्रदेश।
क्षेत्रिय प्रभारी, हिमाचल प्रदेश ब्राह्मण सभा

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