देश को उन्नति का पथ पर ले जाने बुद्धिवादी लोग पढ़े
अभी मैएक ब्लॉग पद रहा तजा उसमे एक वरिष्ट पिछड़े वर्ग के लेखक के की विचार श्रंखला देख रहा था ब्राहमण लेखक से सम्मान पाने और ब्राहमण लेखक का प्रसंशक बताने में गुरेज न कर भी वो अपनी पीड़ा कुछ कुछ शब्दों व्यक्त कर रहे थे उन्होंने बनायीं सूचि के अनुसार " आधुनिक हिंदी साहित्य की एक सूची है. इसमें दस कवियों और दस कथाकारों के नाम हैं-क्या यह सिर्फ संयोग है कि एकाध अपवाद को छोडक़र कवि सारे ब्राह्मण हैं और सारे कथाकार गैर-ब्राह्मण...यह सूची कुछ इस प्रकार थी : पंत, निराला, महादेवी, अज्ञेय, मुक्तिबोध, मंगलेश डबराल, नागार्जुन, राजेश जोशी, अशोक वाजपेयी, अरुण कमल. और उधर कहानीका हैं :प्रेमचंद, जैनेंद्र, यशपाल, भगवती चरण वर्मा, रेणु, मोहन राकेश, संजीव, पंकज बिष्ट, उदय प्रकाश, प्रियंवद और असगऱ वजाहत." ब्राहमणों को जाती वादी वर्ण वादी व्यवस्ता का दोसी करार देते हुए शुद्रो पिछडो को ज्ञाननार्जन का दोषी भी बताते है read more »
श्री चक्रमहामेरू पीठम के पीठाधीश्वर दण्डी स्वामी सच्दिानंद तीर्थ का चातुर्मास इस वर्ष 24 जुलाई 2010 से 26 सितम्बर 2010 तक ग्राम कलपाती पलकड़ जिला केरल में संपन्न होने जा रहा है । स्वामी सच्चिदानंद विश्वनाथ स्वामी टेम्बल देवास्म हॉल कलचेटी रोड में निवास करेंगे । इस कार्यक्रम का आयोजन अस्थिका समाज कलपाथी एवं चातुर्मास महोत्सव आयोजन समिति कलकड-3 द्वारा किया जा रहा है । read more »
ब्राह्मण एक ऐसे निर्धन व्यक्ति की संज्ञा है, जिसे मुद्रा पर नहीं, अपितु विद्या पर आस्था है । यही उसका सर्वोत्तम आदर्श है । ब्राह्मïण के लिए तो भिक्षा ही धन है । आदिकाल से ब्राह्मïण भिक्षा पर जीने का विश्वासी रहा है । जगन्नाथ महाप्रभु ने अपने ब्राह्मïण भक्त की श्रद्धा पर रीझते हुए जो संस्कार दिया । उसका सार है - ब्राह्मण मुझे मो आहार । लक्ष्मी को ब्राह्मïण के घर आनंदानुभूति कहां होती है ।
ब्राह्मण निर्धन हुआ तो क्या हुआ, एक वही है जो पवित्र पैतृकता में जन्म लेता है, पवित्र आचरण करता है,यश कमाता है और लोगों को पाठ पढ़ाकर उन्हें पूर्णता की ओर उन्मुख करता है । वह सनातन परंपरा का संपोषक रहा है। सोलह संस्कारों का साक्षी एवं संचालक । ब्राह्मïण होने का मतलब सूर्य बनना है, जिसके उदय होते ही रात की कलुषताओं का रंग विलीन हो जाता है । ब्राह्मïण होने का अर्थ सामाजिक परिसरों का शुद्धीकरण है, जहां न प्रतिशोध के लिए जगह है और न ही दमन के लिए, ब्राह्मïण का आशय है विशाल समुद्र है जो कभी नहीं घटता है । सदा से ही ब्राह्मïण का धर्म और कर्म कुव्यवस्था के विरूद्ध संघर्ष को दिशा देना रहा है । तभी तो ज्ञान, चेतना, विद्या, वाणी तथा अभिव्यक्ति का पवित्रतम् उत्तरदायित्व उसके नाम है ।
राजा को ही भुसूर नहीं कहा जाता, ब्राह्मïण ही भुसूर कहलाते हैं । ब्राह्मïण बिना राजा के रह सकता है, किन्तु एक राजा ब्राह्मïण के बिना कदापि नहीं । ब्राह्मïण सर्वथा, सर्वदा शांति का पुजारी रहा है । वह समाज के सभी वर्गों एवं वर्णों की प्रसन्नता के लिये गीत गाता रहा है । जो समय आने पर आयुध भी धारण कर लेता है । वह चाणक्य बनकर नंदवंश की यातना सेप्रजा को मुक्ति दिलाने में भी पीछे नहीं हटता । वह ब्राह्मïण ही है, जो कभी द्रोणाचार्य बनकर कौरव वंश को समूल नष्टï करने का गुरू मंत्र पांच पांडवों को देता है । कभी वह अश्वत्थामा बनकर युद्ध की रणभेरी बजाता है, तो कभी वह परशुराम बनकर विध्नकारी शक्तियों को नामोनिशान मिटा देता है ।
ब्राह्मण पंडित है और पांडित्य उसकी पहचान । वह अग्रजन्मा है, इसलिए वह सभी भाईयों का मार्गदर्शक भी है । वह द्विज है, इसलिए उसे दुनिया के अनुभवों का दोहरा लाभ प्राप्त होता है । ब्राह्मïण सर्वश्रेष्ठï विद्यार्थी है और सर्वश्रेष्ठï प्राध्यापक भी । हमारी खुबिया हमारी पहचान है । हमारे युवा आज के इंटरनेट मोबाईल युग कर लो दुनिया मुी में के विपरीत दुनिया के मुी में समाते जा रहे हैं । एक ब्राह्मïण चाणक्य एवं एक परशुराम बनकर सम्पूर्ण समाज का उद्धार किया करता था, पर आज हम भीड़ में गुम होते जा रहे हैं । read more »
छत्तीसगढ़ राज्य की उर्वरा भूमि पर विप्र वार्ता का जन्म चार वर्ष पूर्व सर्वाधिक शुभ एवं अगणनीय मूहूर्त पावन अक्षय द्वितीया के दिन हुआ, पचासवां अंक आपके हाथों में सौंपते हुए हार्दिक प्रसन्नता हो रही है । इस अवसर पर आप सभी का साधुवाद करते हुए धन्यवाद देता हूं एवं साथियों को शुभकामनाएं ।
आदिकाल से ब्राह्मïण ऋषि, परमेश्वर का सेवाधर्म पालक एवं द्योतक रहा है । विशिष्टï दृष्टिï रखने वाले व्यक्ति को ऋषि कहा जाता है वेदों के अनुसार वर्ण व्यवस्था में ब्राह्मïण को मनुष्य के शरीर में सर्वोच्च स्थान प्राप्त था वो मस्तिष्क माना जाता है , भारतीय परम्परा में बह्मï के खोज करने वाले ज्ञानी को ब्रम्हर्षि कहा गया । ब्रह्मïर्षि का कार्य शास्त्र का विकास करना था । ऋषियों ने यक्ष रूपी विचारों को जागृत कर लोक चेतना तक पहुंचाने का कार्य कुशलतापूर्वक किया है । ऋषि चिंतनशील सेवाभावी, वाणी का लोक कल्याण में उपयोग करते थे इसी परम्परा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय संस्कृति त्याग, तपस्या और सहनशीलता की पहचान है । ब्राह्मïण ने सदैव चाणक्य और परशुराम के रूपमें लोक कल्याण के लिए ही शस्त्र और शास्त्रों का प्रयोग किया है । read more »
dilhi- today 8 aug sarva brahman mahasabha has given "Brahmanshiromani upadhi" to pune besaed "akhil Bhartiy Brahman mahasangh`s national precident Mr. Govind Kulkarni C.g. Yuthlieder Ajay Tripathi ,Bundelkhand`s youthlieder Mr. Bharat Tiwari gest of the oner is Mr. Satyavrat Chaturwedi (M.P) at Constitution clab ,rafi marg New delhi
आज दिल्ली के कोसितुसनल क्लब रफ़ी मार्ग में सर्व ब्राहमण महासभा जयपुर द्वारा अखिल ब्रह्मण महासंघ के अध्यक्ष श्री गोविन्द कुलकर्णी एवं छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष अजय त्रिपाठी का सम्मान ब्रह्मण समाज को जागृत करने के लिए ब्राहमण शिरोमणि की उपाधि से सम्मानित किया गया कार्यक्रम के मुख्यअतिथि संसद सत्यव्रत चतुर्वेदी थे


14 अप्रैल, 1926 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में जन्में श्री रामशंकर अग्निहोत्री 1944 में मंडला जिले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने। वे 1949 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, महाकौशल के संगठन मंत्री नियुक्त हुए और 1951 में विंध्य read more »
भगवान श्री परशुराम के पूजन एवं सर्वे भवन्तु सुखिन: के पवित्र उद्घोष के साथ विप्र भवन कवर्धा में सर्व ब्राह्मण समाज का अष्टम महाधिवेशन उल्लासपूर्वक सम्पन्न हुआ । प्रथम सत्र का विषय था सामाजिक संचेतना. इसके मुख्य अतिथि श्री विरेन्द्र पाण्डेय अध्यक्ष समग्र ब्राह्मण प्रांतीय महासभा कार्यक्रम अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार मिश्र ने की । विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री रामशरण तिवारी, श्री अजय त्रिपाठी, श्री सी.पी. शर्मा, श्री अमृत लाल बिलथरे, श्री दशरथ प्रसाद शुक्ला उपस्थित थे । सत्र में अनेक वक्ताओं ने सामाजिक संचेतना विषय पर अपने विचार व्यक्त किए । सभी ने ब्राह्मण समाज की उत्तरोत्तर प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की ।
इस विचार सत्र में श्री संतोष पाण्डेय, श्री विजय शर्मा, श्री बृजकिशोर पाण्डेय, श्री उमेश पाठक श्री देवी प्रसाद शास्त्री, श्री दामोदर शर्मा एवं अन्य वक्ताओं ने भी सारगर्भित विचार व्यक्त किए । इस सत्र में संस्कृत अध्ययन, कर्मकाण्ड में निपुणता प्राप्त करने के साथ आधुनिकतम ज्ञानार्जन किये जाने पर बल दिया गया । सभी वक्ताओं ने ब्रह्मणोचित कर्म के प्रति विशेष आग्रह प्रकट किया । read more »
अ. भा. कान्यकुब्ज ब्राह्मïण महासभा 6 जून को
6 जून 2010, रविवार को महासभा का 17 वां वार्षिक अधिवेशन तथा 7 जून 2010 सोमवार को ब्राह्मïण बालक बालिकाओं का सामूहिक विवाह पारिवारिक परिचय एवं यज्ञोपवीत संस्कार समारोह आयोजित किया जा रहा है । विवाह हेतु जोड़ों एवं बटुकों का पंजीकरण कराने किदवई नगर कानपुर से संपर्क करे ।
भारत के तमाम शहरों के कान्यकुब्ज ब्राह्मïण अपने बच्चों को सामूहिक जनेऊ में शामिल कर सकते हैं तथा लडक़े एवं लड़कियों की शादी तय करने के बाद सामूहिक विवाह का फायदा उठावें ।
अधिक जानकारी के लिए श्री राजेश पाठक से संपर्क करें। मो. 9935359901, 9415941972
वृन्दावन । अखिल भारतीय वर्षीय ब्राह्मïण महासभा का दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन अखण्ड चित्रकूट आश्रम वृन्दावन में हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ श्री श्री 108 श्री स्वामी हरिहरानन्द जी सरस्वती महामंडलेश वर अमरकंटक द्वारा भगवान परशुराम के छायाचित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलन कर किया । युगल किशोर भगवान श्री राधाकृष्ण के चित्र पर राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश दत्त शर्मा द्वाराकिया गया ।
युवा ब्रज मंडलीय महासभा मथुरा द्वारा राष्ट्रीय अध्यक्ष को 31 किलो की फुलमाला पहना कर स्वागत किया । नगर अद्यक्ष वृन्दावन अतुलकृष्ण गोस्वामी द्वारा भी राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत महाल्र्यापण कर , शाल पहनाकर तथा भगवान श्री बांके बिहारी की प्रतिमा भेंटकर किया । स्वामी हरिहरानन्द जी सरस्वती ने आव्हान किया कि read more »
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