कुंभ का पर्व चंद्रमा, सूर्य, तथा बृहस्पति ग्रहों के संयोग से होता है । चारो स्थान जैसे हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, प्रयागराज में जब पृथक पृथक रााशि में ग्रह एकत्रित होते हैं तब कुंभ होता है। बारह वर्ष में जो होता है वह कुंभ है । व छै: वर्ष में जो भरता है वह अर्ध कुंभ है । इस पर्व पर दान, व्रत, स्नान, भजन, सत्संग, सेवा तीर्थ स्नान, दान पुण्य , यज्ञ में कार्य किये जाने चाहिए ।
जहां कुंभ भरता है वहां पवित्र नदी मां है । इसी तरह हमारे छ.ग. में प्रतिवर्ष कुंभ का आयोजन होता है छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में कुंभ का अपना विशेष महत्व है । राजिम भगवान कुलेश्वरनाथ की नगरी है । यहां कुंभ स्नान विशेष फलदायी होता है। कुंभ की कथा - एक बार देवता और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया जिसमें भगवान धन्वंतरी हाथ में अमृत कलश लेकर निकले । देवता और दैत्य दोनों ही उस अमृत कलश को लेना चाहते थे ।
तभी इंद्र का पुत्र जयंत उस अमृत कलश को लेकर भागा देवता उसका पीछा करने लगे बारह वर्षों तक देवता और दैत्यों में युध्द हुआ इसी बीच कलश हरिद्वार, नासिक, उज्जैन व प्रयागराज में यह कलश रखा गया व फिर उठाया गया इन स्थानों पर कलश से अमृत छलक जाने से इनका महत्व और बढ़ गया । इसे कुंभ पर्व कहते हैं । कुंभ में बड़े बड़े नागा साधु जो साधारणत: दिखाई नहीं देते वे कुंभ में दिखाई देत है प्रवचन, कथा महत्व, यज्ञ, तप, योग कर्म कुंभ में होते हैं । विशेष कर स्नानव पुण्य दर्शन लाभ कुंभ में होते हैं ।
अत: आप समस्त भक्त कुभ पर्व का जरूर लाभ उठाये इसका महत्व अपने आप में बहुत अधिक है ।
अमित शर्मा, विशेष संवादताता, रायपुर

रायपुर । सूझबूझ से परिपूर्ण सक्रिय राजनेताओं के हाथ में सत्ता की कमान होनी चाहिए । मोटी आमदनी आज राजनीति का पर्याय बन चुकी है । यह देश के लिए कलंक है । आध्यात्मिक ऋषि के मार्गदर्शन में दिशाहीन नेतृत्व को दिशा दें । उक्त बातें गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने समता कॉलोनी स्थित खाटू श्याम मंदिर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही ।
स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता - सत्तालोलुप नेताओं की वजह से राष्ट्र के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है । देश को बचाने के लिए दिशाहीन शासनतंत्र को नियंत्रित करने की आवश्यकता है । दिशाहीन अर्थतंत्र घातक है । भारत का कच्चा माल विदेशों में जा रहा है । रक्षा शिक्षा एवं अर्थतंत्र कूटनीतिज्ञों के हाथ में चली गई है । देश की श्रीहीन होने से बचाने के लिए स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता है ।
गिर रही तीर्थस्थलों की गरिमा - पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि राजस्थान में पिछले कई वर्षों से कृष्ण की लीलास्थली नष्ट की जा रही है ।
टिहरी बांध के निर्माण के बाद से लगातार गंगाजल प्रदूषित होती जा रही है । तीर्थस्थलों की गरिमा लगातार गिर रही है । आज हिन्दुओं की चेतना विलुप्त हो रही है । ऐसी स्थिति में सहिष्णु बनाने वाला शासन तंत्र चाहिए ।
आरोप मुक्त हो संत - संत आसाराम बापू के संबंध में शंकराचार्य ने कहा कि संतों का जीवन आरोपमुक्त होना चाहिए। संतों का जीवन ऐसा होना चाहिए कि शासन ऊन पर आरोप लगाने की हिम्मत न कर सके । संतों को अपना व्यक्तित्व त्याग एवं तपस्या से बनाना चाहिए । read more »

भारतीय पंचाग पध्दति में प्रतिवर्ष सौर पौष मास को खरमास कहते हैं ।इसे मलमास भी कहा जाता है । इस महीने का आरंभ 14 दिसंबर से होता है और ठीक मकर संक्रान्ति को खरमास की समाप्ति होती है । खरमास के दौरान हिन्दु जगत में कोई भी धार्मिक और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं । इसके अलावा यह महीना अनेक प्रकार के घरेलू और पारंपरिक शुभ कार्यों की चर्चाओं के लिए भी वर्जित है ।
देशाचार के अनुसार नवविवाहिता कन्या भी खरमास के दौरान पति के साथ संसर्ग नहीं कर सकती और उसे इस पूरे महीने अपने मायके में आकर रहना पड़ता हौ । खरमास में सभी प्रकार के हवन, विवाह, चर्चा, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, यज्ञोपवीत , विवाह या अन्य हवन कर्मकांड निषेध है। सिर्फ भागवत कथा या रामायण कथा का सामूहिक वर्ण ही खरमास में किया जाता है । ब्रह्म पुराण के अनुसार खरमास में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति नर्क का भागी होता है । व्यक्ति अल्पायु हो या दीर्घायु अगर वह पौष के स्तर मास की अवधि में अपने प्राण त्याग रहा है तो उसका इहलोक और परलोग नरक के द्वार की तरफ खुलता है ।
इसबात की पुष्टि महाभारत में होती है, जब खरमास में अर्जुन ने भीष्म पितामह को धर्म युध्द में बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था । सैकड़ों बाणों से विध्द हो जाने के बावजूद भीष्म पितामह ने अपने प्राण नहीं त्यागे । इसका मूलकारम यही था कि अगर वह खरमास में प्राण त्यागते तो उनका अगला जन्म नर्क की ओर जाता । लिहाजा उन्होंने अर्जुन से एक ऐसा तीर चलाने के लिए कहा जो उनके सिर पर विध्द होकर तकिये का काम करे । इस तरह भीष्म पितामह पुरे खरमास में अर्ध्द मृत अवस्था में बाणों की शैय्या पर लेटे रहे और जब माघ मास की मकर संक्रान्ति आई उसके बाद शुक्ल पक्ष की एकादशी को उन्होंने अपने प्राण का त्याग किया ।

शाजापुर । भारत में बुराईके प्रतीक रावण को जिस प्रकार से दशहरे के दिन जलाया जाता है उसी तरह से मध्यप्रदेश के शाजापुर शहर ेंदीपावली बाद दसवें दिन कार्तिक दशमी को कंसका वध हर्षोल्लास के साथ किया जाता है। कंस वधोत्सव समिति के दुर्गाशंकर मालवीय ने बताया कि दीपावली के बाद कार्तिक दसमी पर शहर में कंस वध किया जाता है । उन्होंने बताया कि पूरे देश मे ंब्रज भूमि मथुरा और प्रदेश के मालवा अंचल के शाजापुर शहरमेंकंस का वध किया जाता है।
शाजापुर में कंसवध का आयोजन लगभग 128 वर्षों से परंपरागत तरीके से किया जा रहा है । उन्होंने बताया कि कार्तिक दशमी के दिन देवताओं, राक्षसों, भगवान श्रीकृष्ण एवं बलराम के किरदारों के पात्रों का विशाल चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से निकाला जाता है । चल समारोह के दौरान स्थानीय चौक बाजार में भगवान श्री कृष्ण एवं बलराम का राक्षसों से वाकयुध्द का संवाद होता है । संवादों के माध्यम से पात्र एक दूसरे पर हमला करते हैं श्री मालवीय ने बतायाकि कार्तिक दशमी पर निकाले जाने वाले चल समारोह के बाद कंस चौहारे पर 35 फीट ऊंचे मंच पर बनाये गए कंस के पुतले का वध रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण और बलराम द्वारा किया जायेगा ।
छत्तीसगढ़ी में पं. गुणवंत व्यास ने सुनाएं नये प्रयोग
रायपुर । रागदारी यानी शास्त्रीय संगीत, भाषा मुक्त विधा है, किसी भाषा के होने न होने से इसकी पेशकश प्रभावित होगी कहना कठिन है । फिर भी इसे प्रयोगात्मक नजरिये से देखने वालों के हौसले की दाद देनी होगी जो आगे बढ़ रहे हैं । श्री रामसंगीत महाविद्यालय में यह प्रयोग संक्षेपिता की तर्ज पर सुना गया । भातखण्डे ललित कला शिक्षा समिति के एक उपक्रम डॉ. अरूण कुमार सेन स्मृति शोध संस्थान में बतौर निदेशक प्रो. गुणवंत माधव लाल व्यास ने कुछ वर्ष पूर्व इस अनूठे छत्तीसगढ़ी प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया था ।
बकायदा इसे छत्तीसगढ़ी सीडी और कैसेट सहित संग्रह की शक्ल में बाजार में उतारा भी गया । गुरत्तर गाले राग वाली उस छत्तीसगढ़ी प्रगतिशील योजना को फिलहाल कितनों ने अपनाया कहना कठिन है अलबत्ता छत्तीसगढ़ी प्रयोग के जनक प्रो. व्यास मिलने वाले मौकों पर रागदारी के छत्तीसगढ़ी स्वरूप को सुनाना नहीं भूलते । read more »

अब वह जमाना चला गया जब माता- पिता जाकर अपने बच्चों को रिश्ता तयकर आते थे और बच्चे भी बिना कुछ पूछे पेरेट्स की पसंद के सात जीवन गुजार देते थे, वक्त ने करवट ली है और करवट ली है बच्चों की सोच नें –
आज की पीढ़ी अपने जीवन साथी को लेकर बिल्कुल अलग किसम के गुणों की तलाश में है । लेकिन सवाल यह है कि वह किस चीज की तलाश में है5-9 8गुणांक वह गुण क्या है , जो आज की पीढ़ी को लगता है कि उसके आदर्श साथी में होने चाहिए? 6जनवरी
गुणवत्ता नियंत्रण - लुक्स की चिन्ता करना छोड़ दें, आजकल बाहरी आवरण इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि व्यक्ति का चरित्र, आदर्श व्यक्ति वही होगा जो वफादारी और निष्ठा से भरा हो, आज की महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण है, आजकल लड़कियां स्वयं तो अपने कैरियर में स्थापित है ही और साथी भी ऐसा चाहती है जिसका मोटा बैंक बैलेंस हो और वह सुसंस्कृत भी
हो । read more »
दिसंबर 2009 से अप्रेल 2010 तक गुरू के अस्त व खरमास के कारण शादियां नहीं हो पाएंगी । शादी का इंतजार कर रहे लोगों का इंतजार खत्म हो गया है । रविवार को देवउठनी के सात ही मंडपों में शहनाई गूंजने लगी । आज तुलसी विवाह जैसा शुभ मुहूर्त होने के कारण राजधानी सहित अंचल में अनेक शादियां हुई । रामनवमी में शुभ मुहूर्त नहीं होने के बावजूद शादियां होगी । इस माह देवउठनी केबाद 22,23, व 29 नवंबर को विवाह किए जा सकेंगे । इसके बाद दिसंबर में 2,7,11,12 व 13 को शुभ मुहूर्त है ।
दिसंबर के बाद फरवरी में विवाह -14 दिसंबर से 12 फरवरी तक विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है, 13 से गुरू पश्चिम में अस्त हो जाएगा । सिके बाद उसका उदय पूर्व में 7 फरवरी को होगा, लेकिन बालयत्व दोष बना रहेगा, इसलिए विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है । read more »
गणपति जी का बीज मंत्र गं है, इनसे युक्त मंत्र ऊँ- गं गणपतये नम: का जप करने से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है । षडाक्षर का जप आर्थिक प्रगति व समृध्दिदायक है । read more »
अपनी आयु गणना अपने द्वारा लगाए गए जीवित वृक्षों तथा मित्रों से करे अर्थात वार्षिक रोपण करें तथा प्रतिदिन परोपकार करने का प्रयास हो तो पृथ्वी की सभी समस्याएं समाप्त हो जाएगी । प्रत्येक धर्मस्थल में सभी के लिए नि:शुल्क आवास, भोजन, प्रसाद, चायपान की गुरूद्वारा जैसी व्यवस्था की जाये तो संसार की भुखमरी, गरीबी समाप्त हो जाएगी ।
मनुष्य मनुष्य में हर प्रकारकी समता की पारिवारिक भावना रखने वाले केवल मानवतावादी सज्जन विश्व कवि संसद में सहभागिता एवं विजयादशमी 5111 दिनांक 28.09.09 सोमवार से प्रारंभ 5 दिवसीय मानवता यज्ञ सम्मेलन धनुषकोटि रामेश्वर ममें सादर आमंत्रित है। ऊँ नम: शिवाय रामेश्वराय । मानवता कुलम् मित्रता पंजीकरम शुल्कम् रू. 100 । read more »
रायपुर । संतान की दीर्घाय के लिए महिलाएं 12 अगस्त को खमरछट (हलषष्ठी) पर उपवास किया । पूजा के लिए पसहर चावल, दोना, टुकना व लाई आदि पूजन सामग्री लाई गई।
भाद्रपद कृष्ण पक्ष की छठ को मनाई जाने वाली हलषष्ठी मनाई गई । इस त्यौहार में छह संख्या का विशेष महत्व है । महिलाओं द्वारा उपवास कर छह प्रकार की भाजी व अनाज का सेवन कर छह प्रकार की कथा सुनने की परंपरा प्राचीनकाल से चली आ रही है । पूजन स्थल पर तालाब का निर्माण कर इसे कांस, पलास व खम्हार के पत्तों से सजाते हैं । read more »
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