Kavita

विधि ने ये क्या कर डाला

युवाओं के प्रेरणास्रोत स्व. श्री रवि भईया
अभिनन्दन की बेला में
विधि ने ये क्या कर डाला
निडर ओजस्वी जन नायक को
क्यूं अनायास उठा डाला
कठिन संघर्ष किया वर्षों तक
अभी अभी पथ पाया था
विकास पुरूष बनकर उभरे
जन जन का मन हर्षाया था ।
था विराट व्यक्तित्व आपका
हर दिल दिमाग पर छाया था
सरगुजा ने जांबाज योद्धा
रवि रूप में पाया था
ऐसा होगा सात आपके
सपने में न आया था  read more »

छत्तीसगढ़ी कविता

आगे फेर नवां साल
आगे फेर नवां साल
गुतुरबोली अऊ टमाटर सांस
बिहनिया ले जाड़ मां उठ के दौरी फदावत हे
ओ हो तो तो कहि के पेर हा मिजावत हे
आगे फेर नवां साल हे...

रास हा रचाये हे अब हो ही नपाई
एक ले दु होही गाड़ा दु गाड़ा के जुखाई
मझनिया होगे और होगे खाये के बारे रे संगवारी
तोला न्योते लोटा अऊ थारी...

बुकनी चटनी संग खावत हो बात बांसी
तभो लेमन हावे मौसम ले देख के उदासी
आगे फेर नवां साल हे....

हप्ता ले महिना पूरा तारिख ह बदलथे
एक ले दू तारिख कहिके हमर साल ह निकलथे
अब बैठे के समय नहीं हे संगवारी
फेर आहि नवा साल के बारी

आगे फेरनवां साल..
आगे फेरनवां साल..

संदीप भाई रत्नाकर, डोंगरगांव

Ajay Tripathi's picture

गजल

जिन्दगी की धूप छांव
कभी गाड़ी कभी नांव
प्यार की चुभन मिलन
कभी कांटा, कभी पांव
जुल्म की सौगात यही
कभी मरहम , कभी घाव
बैठी है भूख लेकर
कभी पांसे, कभी दांव ।
जारी है तलाशे सुकूं
कभी शहर, कभी गांव ।.

तीन कविताएं ...

कहीं हम भूल न जाये
इतिहास खुद का
कहीं हम कर न डालें
उपहास खुद का
आनंद शोध का विषय तो
स्वयं विप्र है
कहीं हम खो न दे
विश्वास, खुद का ।

जब भी धर्म से फटा है आदमी
जब भी वर्ण से बंटा है आदमी
रक्त गंगा में ही नहाता रहा है
जब भी सत्य से हटा है आदमी

जीने का अन्दाज बदल डालो  read more »

Syndicate content