दिसंबर 2009 से अप्रेल 2010 तक गुरू के अस्त व खरमास के कारण शादियां नहीं हो पाएंगी । शादी का इंतजार कर रहे लोगों का इंतजार खत्म हो गया है । रविवार को देवउठनी के सात ही मंडपों में शहनाई गूंजने लगी । आज तुलसी विवाह जैसा शुभ मुहूर्त होने के कारण राजधानी सहित अंचल में अनेक शादियां हुई । रामनवमी में शुभ मुहूर्त नहीं होने के बावजूद शादियां होगी । इस माह देवउठनी के बाद 22,23, व 29 नवंबर को विवाह किए जा सकेंगे । इसके बाद दिसंबर में 2,7,11,12 व 13 को शुभ मुहूर्त है ।
दिसंबर के बाद फरवरी में विवाह -14 दिसंबर से 12 फरवरी तक विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है, 13 से गुरू पश्चिम में अस्त हो जाएगा । जिसके बाद उसका उदय पूर्व में 7 फरवरी को होगा, लेकिन बालयत्व दोष बना रहेगा, इसलिए विवाह के लिए शुभ मुहूर्त नहीं है ।
मार्च शादी के लिए तरसाएगा । इस माह शादी के लिए केवल 12 मार्च को ही शुभ मुहूर्त है । फरवरी में 13,14,15,16,17,19,20,26,27 व 28 तारीख को युवा दाम्पत्य जीवन में बंधेगे । इसके अलावा 2 दिसंबर से अप्रेल 2010 तक गुरू अस्त होने व खरमासके कारण शादी के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है । पंडितों के अनुसार शुभ कार्यों में गुरू का फल आवश्यक होता है । गुरू के अस्त होने पर शुभ कार्य अपनी शुभता खो देंगे । गुरू के निर्बल रहने के कारण सभी शुभ कार्य निषिध्द हो जाएंगे । 13 मार्च से 9 अप्रेल तक खरमास होने के कारण शादी संभव नहीं होगा । फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा अर्थात होली से 9 अप्रेलतक खरमास रहेगा । जब सूर्य धनु व मीन राशि में हो तो कोई शुभ कार्य नहीं किया जा सकता ।
प्रदेश में यहां रामनवमी 3 अप्रेल 2009 के दिन शादी के लिए पंचाग में मुहूर्त नहीं है । ग्रामीण जन नवमी को शुभ मुहूर्त मानते हुए इस दिन विवाह संपन्न करते हैं ।
14 अप्रेल से शादियों की धूम - खरमास के बाद 14 अप्रेल से शादियों की धूम रहेगी । अक्षयतृतीया 27 अप्रेल को है । इसदिन अंचल में सर्वाधिक शादियां होती है । इसके अलावा 15,16,17,22,28,29 अप्रेल, मई में 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 12, 13, 14, 15, 19, 20, 21, 25, 26, 30 व 31 मई को विवाह के लिए मुहूर्त है । जून में2,3,4,5,6,7,8,,9,10,11,15,16,20,26,27,28,29.30 व 1 जुलाई को मुहूर्त है । इसके बाद देव शयन करने चले जायेंगे ।
संकलित- ममता राय