जम कर होगी जंग शुरू

घर घर मे होगी बन्दूकें
जेबों में बम्ब भरे होंगे,
आकाश से बारूद बरसेगा
खेतों में तीर उगे होंगे ,
नन्हें मुन्हे बच्चों के
हाथों में होंगे हथगोले
झांसी कीरानी की गाथा
फिर से गायेंगे हरबोले
फिर से आयेंगे भगत सिंग
फिर पैदा होंगे राज गुरू
राष्ट्र द्रोह और राष्ट्र प्रेम में
जमकर होगी जंग शुरू
नारी भी लेकर निकलेगी
हाथों में नंगी तलवारे
हर मोड़ गली में गूंजेगी
धर्म युध्द की ललकारें
राष्ट्र द्रोह के सीने से
कितना खून बहेगा
यह तो लिखना मुश्किल है ।
यह तो इतिहास कहेगा ।
ब्रजेश राजस्थानी
मलोर (राजस्थान)