कार्तिक कृष्ण त्रयोदषी को ही धनतेरस कहते है इस दिन नवीन पात्र खरीदने का बड़ा ही महात्व होता है।
स्मृतियों का कथन है कि धनतेरस के दिन टूटे फूटे बर्तन , टूटी खटियायों दोनों वस्तु लक्ष्मी की वृध्दि चाहने वाले को अपने घर मे नही रखना चाहिए इनके रखने से दरिद्र देव का स्थान प्राप्त होता है सायंकाल को पितरों की प्रसन्न हेतु दीपदान दिया जाता है जिसे पितरों की संतुष्टि होती है।
धनतेरस दीपदान के उपरातं स्नान कर शुध्द वस्त्र धारण करके चर्तुमुखी चांदी ताम्र अथवा स्वर्ण के दीप पात्र में शुध्द कपास की वर्तिका लेकर दीप प्रज्जवलित करें पुष्प अक्षत से दीपक का पूजन करके स्थिर धन क स्थान पर दीपक की स्थापना करें।
इस विधि से जो धन त्रयोदषी के दिन कुबेर का दीपदान करते है उसके घर में लक्ष्मी स्थिर होकर विराजमान रहतें है।
धनतेरस वीडिओ