मंगलकलश

कलश का पात्र जलभरा होता है । जीवन की उपलब्धियों का उध्दव आम्र की पत्तियों नागवल्ली द्वारा दिखाई पड़ता है जटाओं से युक्त ऊँचा नारियल ही मंदराचल है तथा यजमान द्वारा कलष के कंठ में बाँधा रक्षा सूत्र ही वासुकी है तथा यजमान और पुरोहित दोनों ही मंथनकर्ता है ।

इसका वैज्ञानिक पक्ष यह है कि यहाँ है कि जहाँ इस धट का ब्रह्माण्ड दर्शन हो जाता है जिससे शरीर रूपी धट से तादाम्य बनता है वही तॉबे क पात्र मे जल विद्युत चुम्बकीय ऊर्जावान बनता है ।

ऊँचा नारियल का फल ब्रह्माण्डीय ऊर्जा का ग्राहक बना है जैसे विद्युत ऊर्जा उपन्न करने वाले के लिए बैटरी या कोशा होती है वैसे ही मंगल कलश ब्रह्माण्डीय ऊर्जा एकीकृत कोशा है जो वातावरण को दिव्य बनती है कच्चे सूत्रों का दक्षिणावर्ती वलय ऊर्जावान को धीरे धीरे चारों ओर वर्तुलाकार संचारित करता है

संभवत: सूत्र विद्यत कुचालक अनुसंधान का खुला क्षेत्र हैकि शोधकर्ता आधुनिक उपकरणों का प्रयोग भक्ति एंव सम्मानपूर्वक करें ताकि कुछ और नए आयाम मिल सकें।