कुबेर

महालक्ष्मी प्रयोग से कुबेरवत् बनिये

आज का युग अर्थ प्रधान हो गया है, पहले मानव धन को इतना महत्व नहीं देता था, धन केवल जीवन और विनिमय का ही साधन मात्र होता था, किन्तु सब कुछ नहीं । पहले का मानव अपनी आवश्यकताओं को आपस में मिलजुल कर ही पूरा कर लिया करता था, जैसे जो मोची है, वह जूते बनाकर के दर्जी को दे देता और दर्जी उसे धन के स्थान पर

धनतेरस - धन फेस्‍टीवल

कार्तिक कृष्ण त्रयोदषी को ही धनतेरस कहते है इस दिन नवीन पात्र खरीदने का बड़ा ही महात्व होता है।

Subscribe to RSS - कुबेर