आज का युग अर्थ प्रधान हो गया है, पहले मानव धन को इतना महत्व नहीं देता था, धन केवल जीवन और विनिमय का ही साधन मात्र होता था, किन्तु सब कुछ नहीं । पहले का मानव अपनी आवश्यकताओं को आपस में मिलजुल कर ही पूरा कर लिया करता था, जैसे जो मोची है, वह जूते बनाकर के दर्जी को दे देता और दर्जी उसे धन के स्थान पर