हिन्‍दी

जम कर होगी जंग शुरू

घर घर मे होगी बन्दूकें
जेबों में बम्ब भरे होंगे,
आकाश से बारूद बरसेगा
खेतों में तीर उगे होंगे ,
नन्हें मुन्हे बच्चों के
हाथों में होंगे हथगोले
झांसी कीरानी की गाथा
फिर से गायेंगे हरबोले
फिर से आयेंगे भगत सिंग

अभिमान

मानव में अभिमान भरा ।
मानवता में स्नेह भरा ।
जहाँ भरा है अभिमान ।
वहां पड़ा है अभिशाप ।
जीवन ही के ढाल है ।
हाथ एक तलवार हौ ।
दुनिया बड़ा कमाल है ।
मानव बड़ा जलाल है।
राह बड़ा उद्विग्न है ।
कदम बड़ा कठोर है ।
मानव बड़ा निष्ठुर है

तीन कविताएं ...

कहीं हम भूल न जाये
इतिहास खुद का
कहीं हम कर न डालें
उपहास खुद का
आनंद शोध का विषय तो
स्वयं विप्र है
कहीं हम खो न दे
विश्वास, खुद का ।

नववर्ष शुभकामना कविताएँ व रचनाऐं

शीर्षक एक बात अनेक
नववर्ष
नवयुवकों के लिए नई चेतना का
निर्दोषों के लिए न्याय का
नववधू के लिए सुखमय
वैवाहिक जीवन का हो ।

नववर्ष

दीप वर्तिक

काट जगत तिमिर पाश । न रहें रंचमात्र संत्रास ॥
अन्तस भर नव उच्छवास । बंदनवार सजे धरा आकाश ॥
शुभ्र ज्योत्स्त्रा दे ज्योति मालिके । जग आलोकित हो दीप वर्त्तिके ॥

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