Submitted by Ajay Tripathi on Sat, 12/24/2011 - 22:25
घर घर मे होगी बन्दूकें
जेबों में बम्ब भरे होंगे,
आकाश से बारूद बरसेगा
खेतों में तीर उगे होंगे ,
नन्हें मुन्हे बच्चों के
हाथों में होंगे हथगोले
झांसी कीरानी की गाथा
फिर से गायेंगे हरबोले
फिर से आयेंगे भगत सिंग
Submitted by Ajay Tripathi on Fri, 12/23/2011 - 06:24
मानव में अभिमान भरा ।
मानवता में स्नेह भरा ।
जहाँ भरा है अभिमान ।
वहां पड़ा है अभिशाप ।
जीवन ही के ढाल है ।
हाथ एक तलवार हौ ।
दुनिया बड़ा कमाल है ।
मानव बड़ा जलाल है।
राह बड़ा उद्विग्न है ।
कदम बड़ा कठोर है ।
मानव बड़ा निष्ठुर है