कलश का पात्र जलभरा होता है । जीवन की उपलब्धियों का उध्दव आम्र की पत्तियों नागवल्ली द्वारा दिखाई पड़ता है जटाओं से युक्त ऊँचा नारियल ही मंदराचल है तथा यजमान द्वारा कलष के कंठ में बाँधा रक्षा सूत्र ही वासुकी है तथा यजमान और पुरोहित दोनों ही मंथनकर्ता है ।