।। श्री गुरूवे नम: ।।
परम् पूज्य वेदव्यास महाराज जी के अवतरण दिवस पर संपूर्ण हिन्दुस्तान में गुरू पूर्णिमा का त्यौहार मनाय ाजाता है । इस पर्व से गुरू की श्रेष्ठ महत्ता का ज्ञान प्राप्त होता है। गुरू को भगवान से भी बड़ा माना जाता है । श्री गुरू से हमारे जीवन की नैय्या को पार लगाने में पूर्णत: आशष प्राप्त होता है । ये शास्त्रोतक है कि गुरू जीवन में सदा श्रेष्ठ है । गुरू का स्थान सदैव प्रथम है जो जीवन को जीने की कला प्रदान करे । बिना गुरू के ज्ञान प्राप्त हो ही नहीं सकता ।
जो आत्मा से परमात्मा का मेल कराता है । वही गुरूवर हमें सद्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करते हैं । श्री भगवान गोविन्द ने स्वंय बताया है
गुरू गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पांय।
बलिहारि गुरू आपनो गोविंद दियो बताए।।
अर्थात गुरू की महिमा भगवान से भी आगे है पहले गुरू है उसके बाद प्रभु ।