प्राचीन

संस्कृत के विकास से प्राचीन गौरव

संस्कृत भाषा के विकास से ही भारत को विश्वगुरू का प्राचीन गौरव मिलेगा। भारत को अगर अपना प्राचीन गौरव हासिल करना है तो संस्कृत को प्रोत्साहन देना ही होगा। क्योंकि संस्कृत से ही संस्कृति का विकास हुआ है।यह विचार नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने एनआईटीटीटीआर में व्यक्त किए। वे यहाँ अखिल

छत्तीसगढ़ का रामायणकालीन इतिहास

देश का मध्य स्थल छत्तीसगढ़ प्रान्त प्राचीन समय में दक्षिण कोशल के नाम से जाना जाता था । मेखला, सिहावा, रामगिरि, अमरकंटक जैसे विशाल पर्वत श्रेणियों से यह घिरा हुआ है । इसमें चित्रोत्पला (महानदी) , शिवनाथ, इन्द्रावती, हसदो, खारून जैसी नदियां बहती हैं । छत्तीसगढ़ की इस भूमि में दण्डकारण्य जैसे विशाल

युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार

कन्नौज - कान्यकुब्ज साथी संस्था के तत्वावधान में परशुराम जयंती समारोह इत्रनगरी में मनाई गई। कन्नौज में भगवान परशुराम की ननिहाल है, इस लिहाज से यहां इस पर्व को काफी श्रद्धा से मनाया जाता है। इस मौके पर ब्राह्मण परिवार के पांच युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया गया।

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