भगवान

शिव का पूजन

राशि अनुसार शिव का पूजन-ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि व्यक्ति अपनी रााशि के अनुसार भगवान शिव की आराधना और पूजन करे तो विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं । जिसे अपनी जन्म राशि या नाम राशि पता हो वह व्यक्ति निम्न सामग्री से शिवलिंग पर अभिषेक करे ।

रामनवमी- भगवान श्रीराम का जन्म

रामनवमी- भगवान श्रीराम का जन्म,नौ लाख सत्तर हजार एक सौ बारहवां जन्मदिन,त्रेता युग के संक्रमरा काल में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में नवमी तिथि को दोपहर12 बेज अयोध्या नगरी में आपका जन्म हुआ था। भगवान राम सातवें अवतार माने जाते हैं। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि श्री राम भगवान विष्णु के दसवें अवतार

परशुराम जयंती समारोह

जयपुर । परशुराम जयंती समारोह पर शोभायात्रा जलेब चौक से निकली । इसमें 1100 महिलाएं समान गणवेश में मंगल कलश धारण कर आगे आगे चल रही थी । राजस्थान विप्र सेवा समिति की ओर से सरोजनी मार्ग स्थित परशुराम आश्रम में महाआरती का आयोजन कर जन कल्याण का संकल्प लिया । लक्ष्मी विलास परिसर बालमुकुंद जी मंदिर म

ब्राह्मणों में रामराज्य वाला संस्कार और आचरण जरूरी

आज इस विषय में हमें विचार करना है कि हम ब्राह्मण क्या थे और आज क्या हो

पावन व्रत हरितालिका तीज

हरितालिका व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला स्त्रियों का प्रमुख पर्व है यह व्रत नारी के सौभाग्य की रक्षा करता है ।

पूर्वजो का श्राध्द तर्पण

भगवान गणेश को अनंत का सत्र पहनाकर बिदा दी जाती है । भाद्रपद शुक्ल चतुदर्शी अनंत चतुदर्शी है । अनंत पूजा में कलश के द्वापर कुश से बने सात फन वाले नाग को रखकर तथा अनंत डरेरी को कलश के ऊपर र्रककर सोलह उपचार से पूजा की जाती है ।

गुरू पूर्णिमा

।। श्री गुरूवे नम: ।।
परम् पूज्य वेदव्यास महाराज जी के अवतरण दिवस पर संपूर्ण हिन्दुस्तान में गुरू पूर्णिमा का त्यौहार मनाय ाजाता है । इस पर्व से गुरू की श्रेष्ठ महत्ता का ज्ञान प्राप्त होता है। गुरू को भगवान से भी बड़ा माना जाता है । श्री गुरू से हमारे जीवन की नैय्या को पार लगाने में पूर्णत: आशष प्राप्त होता है । ये शास्त्रोतक है कि गुरू जीवन में सदा श्रेष्ठ है । गुरू का स्थान सदैव प्रथम है जो जीवन को जीने की कला प्रदान करे । बिना गुरू के ज्ञान प्राप्त हो ही नहीं सकता ।
जो आत्मा से परमात्मा का मेल कराता है । वही गुरूवर हमें सद्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करते हैं । श्री भगवान गोविन्द ने स्वंय बताया है
गुरू गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पांय।
बलिहारि गुरू आपनो गोविंद दियो बताए।।
अर्थात गुरू की महिमा भगवान से भी आगे है पहले गुरू है उसके बाद प्रभु ।

गोत्र पुर विचार - डॉ. रामनारायण मिश्र

जम्बूद्वीप में दीर्घ काल से निवास कर रहे तथा जन्म कर्म धारण करने पर शाकद्वीपीय ब्राह्मण भी जम्बूद्वीपीय सदृश हो गये हैं । कुछ क्षेत्रों में यह धारणा है कि पुर भिन्न होने पर समान गोत्र में विवाह करना निषिध्द नहीं है । इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में समान गोत्र में विवाह को निषिध्द माना जाता है। इससे

सूर्यदेव: विज्ञान सम्मत प्रत्यक्ष देवता

सूर्य विज्ञान समम्मत देवता है । सूर्यदेव ही लोकजीवन के साक्षी और सांसारिक प्राणियों की ऑंखों को प्रकाश देने वाले हैं । इसलिए, उनको लोकसाक्षी और जगच्चक्षु कहा गया है । निरूक्त के अनुसार वह आकाश में परिभ्रमण करने के कारण ही सूर्य की संज्ञा प्राप्त करते हैं । वही लोक को कर्म की ओर प्रेरित करते हैं त

भगवान् श्रीराम

भगवान श्रीराम भारतीयों के लिए परम अराध्य, धर्मपरायण है । श्रीराम ही धर्म रे रक्षक, चराचर विश्व की रचना करने वाले, पालनहार तथा संहार करने वाले परब्रह्म के पूर्णावतार है । भगवान श्री राम धर्म के क्षीण हो जाने पर साधुओं की रक्षा, दुष्टों का विनाश तथा पृथ्वी पर शान्ति एवं धर्म की स्थापना करने के लिए

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