भगवान

पावन व्रत हरितालिका तीज

हरितालिका व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला स्त्रियों का प्रमुख पर्व है यह व्रत नारी के सौभाग्य की रक्षा करता है ।

पूर्वजो का श्राध्द तर्पण

भगवान गणेश को अनंत का सत्र पहनाकर बिदा दी जाती है । भाद्रपद शुक्ल चतुदर्शी अनंत चतुदर्शी है । अनंत पूजा में कलश के द्वापर कुश से बने सात फन वाले नाग को रखकर तथा अनंत डरेरी को कलश के ऊपर र्रककर सोलह उपचार से पूजा की जाती है ।

गुरू पूर्णिमा

।। श्री गुरूवे नम: ।।
परम् पूज्य वेदव्यास महाराज जी के अवतरण दिवस पर संपूर्ण हिन्दुस्तान में गुरू पूर्णिमा का त्यौहार मनाय ाजाता है । इस पर्व से गुरू की श्रेष्ठ महत्ता का ज्ञान प्राप्त होता है। गुरू को भगवान से भी बड़ा माना जाता है । श्री गुरू से हमारे जीवन की नैय्या को पार लगाने में पूर्णत: आशष प्राप्त होता है । ये शास्त्रोतक है कि गुरू जीवन में सदा श्रेष्ठ है । गुरू का स्थान सदैव प्रथम है जो जीवन को जीने की कला प्रदान करे । बिना गुरू के ज्ञान प्राप्त हो ही नहीं सकता ।
जो आत्मा से परमात्मा का मेल कराता है । वही गुरूवर हमें सद्मार्ग की ओर चलने को प्रेरित करते हैं । श्री भगवान गोविन्द ने स्वंय बताया है
गुरू गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पांय।
बलिहारि गुरू आपनो गोविंद दियो बताए।।
अर्थात गुरू की महिमा भगवान से भी आगे है पहले गुरू है उसके बाद प्रभु ।

गोत्र पुर विचार - डॉ. रामनारायण मिश्र

जम्बूद्वीप में दीर्घ काल से निवास कर रहे तथा जन्म कर्म धारण करने पर शाकद्वीपीय ब्राह्मण भी जम्बूद्वीपीय सदृश हो गये हैं । कुछ क्षेत्रों में यह धारणा है कि पुर भिन्न होने पर समान गोत्र में विवाह करना निषिध्द नहीं है । इसके विपरीत कुछ क्षेत्रों में समान गोत्र में विवाह को निषिध्द माना जाता है। इससे

सूर्यदेव: विज्ञान सम्मत प्रत्यक्ष देवता

सूर्य विज्ञान समम्मत देवता है । सूर्यदेव ही लोकजीवन के साक्षी और सांसारिक प्राणियों की ऑंखों को प्रकाश देने वाले हैं । इसलिए, उनको लोकसाक्षी और जगच्चक्षु कहा गया है । निरूक्त के अनुसार वह आकाश में परिभ्रमण करने के कारण ही सूर्य की संज्ञा प्राप्त करते हैं । वही लोक को कर्म की ओर प्रेरित करते हैं त

भगवान् श्रीराम

भगवान श्रीराम भारतीयों के लिए परम अराध्य, धर्मपरायण है । श्रीराम ही धर्म रे रक्षक, चराचर विश्व की रचना करने वाले, पालनहार तथा संहार करने वाले परब्रह्म के पूर्णावतार है । भगवान श्री राम धर्म के क्षीण हो जाने पर साधुओं की रक्षा, दुष्टों का विनाश तथा पृथ्वी पर शान्ति एवं धर्म की स्थापना करने के लिए

महर्षि विश्वामित्र भगवान राम के गुरू

महर्षि विश्वामित्र जी को भगवान श्री राम का दूसरा गुरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । वे दण्डकारण्य में यज्ञ कर रहे थे जहां रावण के द्वारा भेजे गये ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे राक्षसों ने बार बार यज्ञ में व्यवधान उत्पन्न किया तब विश्वामित्र ने अपने तपोबल से यह ज्ञात कर लिया की तीनों लोको को भय त

युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार

कन्नौज - कान्यकुब्ज साथी संस्था के तत्वावधान में परशुराम जयंती समारोह इत्रनगरी में मनाई गई। कन्नौज में भगवान परशुराम की ननिहाल है, इस लिहाज से यहां इस पर्व को काफी श्रद्धा से मनाया जाता है। इस मौके पर ब्राह्मण परिवार के पांच युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया गया।

Subscribe to RSS - भगवान