धर्म

ब्राम्हण ग्रन्थों और धर्म के प्रचार प्रसार

मनाना है, तो मान ले, उस शास्त्र-शस्त्र के मार्ग को ।
जिस पर चले और बढ़े, स्वयं भगवान परशुराम ।

अक्षय तृतीया व्रतानुष्ठान पर्व- महत्व

यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है । इस तिथि को किया गया दान, स्नान, जप, यज्ञादि शुभ कार्यों का फल अनन्त गुना होकर मानव के धर्म खाते में अक्षुण्य (अक्षय) हो जाता है । इस से इसका नाम अक्षय तृतीया हुआ ।

महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य,अहिंसा एवं अनुशासन

15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ, आजादी के दीवानों में मंगल पाण्डेय , राजगुरू, भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद की बलिदान के नीव पर महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य अहिंसा एवं अनुशासन के साथ गर्म नौजवानों के जो रक्त अंग्रेजी हुकुमत को भारत छोडऩे मजबूर कर दिया, लेकिन यह एक राजनैतिक सौदा था जिसके पीछे अंग्रेजों क

भगवान् श्रीराम

भगवान श्रीराम भारतीयों के लिए परम अराध्य, धर्मपरायण है । श्रीराम ही धर्म रे रक्षक, चराचर विश्व की रचना करने वाले, पालनहार तथा संहार करने वाले परब्रह्म के पूर्णावतार है । भगवान श्री राम धर्म के क्षीण हो जाने पर साधुओं की रक्षा, दुष्टों का विनाश तथा पृथ्वी पर शान्ति एवं धर्म की स्थापना करने के लिए

समाज सुधार के अगुवा बने

भारत की संस्कृति में तीन शब्दों में व्यक्त करना है तो कह सकते हैं कि हमारी संस्कृति है अर्पण, तर्पण और समर्पण । तीनों में त्याग है और यह त्याग कर्तव्‍य रूपी है, उपकार रुपी नहीं । अर्थात त्याग करके हम किसी पर उपकार नहीं करते । समाज के लिए किया गया त्याग अर्पण हैं, पितरों के लिए माता-पिता के लिये क

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