पर्व

सामाजिक एकता और संस्कृति

ार्मिक सद्भाव, सहयोग पर्व, उत्सव , कला और साहित्य संस्कृति के अंग है । इनका आदान प्रदान संस्कृति एकता को जन्म देता है । संगठन की एकता अखण्डता एक समाज का जीवन और समृद्धि के लिए अनिवार्य है । जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना जानता है वह कभी परास्त नहीं हो सकता । जो समाज दूसरों पर निर्भर रहता है वह ल

54 साल बाद आया दुर्लभ संयोग

शुभप्रद भौमावस्या 24 फरवरी को है , मंगलवार के दिन अमावस्या का यह योग 54 वर्षों बाद बन रहा है।

इस दुर्लभ संयोग में रूद्र पूजन और रुद्र पाठ का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है , विशेष सिध्दि वाला यह दिन रुद्र पूजन के लिये अति उत्तम माना गया है ।

श्रावणी पूजा विधि विधान से संपन्न

गुजराती ब्राह्मण समाज रायपुर द्वारा प्रतिवर्षानुसार अपने रक्षाबंधन पावन पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में सामूहिक यज्ञोपवित संस्कार एवं बह्मभोज का आयोजन किया । क्षत्रीय जातीय सेवा समिति धर्मशाला में ब्रह्म समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए और श्रावणी पूजा विधान के अनुसार संपन्न कर अपने धारण किये ह

नवरात्र पर्व पर दीक्षा का महत्व

दीक्षा का तात्पर्य मंत्रों का प्रदान मात्र नहीं है .. यह तो एक अद्वितीय क्रिया है । अविस्मरणीय क्रिया है, काल के माल पर अंकित होने वाला अद्वितीय क्षण है, बूंद का सागर में या सागर का बूंद में मिलन है ।

दीपावली पर

गोपनीय, दुर्लभ, अद्भुत , आश्चर्यजनक एवं सम्पूर्ण सिध्दि प्रदायक प्रयोग, जिसे प्रत्येक विद्वान, पंडित या गृहस्थ सम्पन्न कर पूरा पूरा लाभ उठा सकता है । और फिर ऐसा पर्व तो वर्ष में केवल एक बार ही आता है ।

जयंती पर्व पर विशेष

पं अयोध्या प्रसाद दुबे आपके पिता श्री भुपत प्रसाद दुबे थे । मुल निवास स्थान ग्राम बटगन था । पलारी जिला रायपुर में 11 फरवरी 1923 को आपका जन्म हुआ था । सन् 1942 के आंदोलन में सक्रिय रुप से भाग लेने के फलस्वरुप कारावास हुआ था ।

बसंत पंचमी विशेष - वीणावादिनी वर दे !

सरस्‍वती संस्‍कृत उवाच -
"साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात पशु: पुच्छविषाण हीन:"

अर्थात् हम अपने जीवन को पशुता से उपर उठाकर विद्या संपन्न, गुण संपन्न बनाएं, बसंत पंचमी इसी प्रेरणा का त्यौहार है ।।

सरस्‍वती पर्व बसंत पंचमी शिक्षा, साक्षरता, विद्या और विनय का पर्व है ।

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