Submitted by Ajay Tripathi on Fri, 03/16/2012 - 11:55
महर्षि ऋचिक के पौत्र और जगदग्नि के पुत्र परशुराम ने अपने पिता की आज्ञा से अपनी माता और भाइयों का सिर काट डाला था जिसके प्रायश्चित स्वरूप उन्होंने पैदल ही पृथ्वी का पर्यटन किया। पृथ्वी का परिभ्रमण करने के बाद वे अपने पितामह ऋचिक के आश्रम में गये। कुशल प्रश्न के बाद परशुराम ने अपनी इक्कीस बार की क
Submitted by Ajay Tripathi on Sun, 01/01/2012 - 00:15
विप्र फाउण्डेशन के मुख्य संरक्षक रतन शर्मा द्वारा 21 करोड़ रुपए की धनराशि की फिक्स डिपोजिट विप्र फाउण्डेशन के नाम तथा आगामी विप्र महाकुंभ के राजस्थान में करने की घोषणा के साथ विप्र महाकुंभ-2011 का विधिवत समापन हुआ। देश की राजधानी दिल्ली के छत्तरपुर मंदिर प्रांगण में हजारो विप्रजनों की उपस्थिति मे
Submitted by Ajay Tripathi on Mon, 12/26/2011 - 21:02
अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ एवं ब्राह्मण समाज ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में 15 वीं लोकसभा में नवनिर्वाचित विप्र सासदों का सम्मान समारोह 9 जुलाई 2009 को संध्या 6 बजे देहली, कर्नाटका संघ एडिटोरियम राव तुलाराम मार्ग से आर.के. पुरम, नईदिल्ली-22 में आयोजित है ।
Submitted by Ajay Tripathi on Thu, 12/22/2011 - 08:10
भारत में विप्र वैदिक काल से अपने आजीविका का साधन मंदिरों में पुजा-अर्चना जजमानों के लिए पुजा कर खेती एवं शिक्षा दान जैसे कर्मों को परंपरागत रुप से उन्नत करते हुए आगे बढ़ते आ रहे हैं समय के साथ-साथ विप्रों ने अपनी भूमिका का सदैव उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है वह चाहे राजा-महाराजाओं के दरबार में नौ रत्नो