सामाजिक

सामाजिक एकता और संस्कृति

ार्मिक सद्भाव, सहयोग पर्व, उत्सव , कला और साहित्य संस्कृति के अंग है । इनका आदान प्रदान संस्कृति एकता को जन्म देता है । संगठन की एकता अखण्डता एक समाज का जीवन और समृद्धि के लिए अनिवार्य है । जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना जानता है वह कभी परास्त नहीं हो सकता । जो समाज दूसरों पर निर्भर रहता है वह ल

अनुशासन लोकतंत्र में अनिवार्य

15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ, आजादी के दीवानों में मंगल पाण्डेय , राजगुरू, भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद की बलिदान के नीव पर महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य अहिंसा एवं अनुशासन के साथ गर्म नौजवानों के जो रक्त अंग्रेजी हुकुमत को भारत छोडऩे मजबूर कर दिया, लेकिन यह एक राजनैतिक सौदा था जिसके पीछे अंग्रेजों क

श्रध्दांजलि स्व. शिव प्रसाद शर्मा

नवागढ़ तहसील के छोटे से गांव बर्रा में प्रबोधिनी एकादशी (19 अक्टूबर 1919) को स्व.

महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य,अहिंसा एवं अनुशासन

15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ, आजादी के दीवानों में मंगल पाण्डेय , राजगुरू, भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद की बलिदान के नीव पर महात्मा गांधी के आदर्शों सत्य अहिंसा एवं अनुशासन के साथ गर्म नौजवानों के जो रक्त अंग्रेजी हुकुमत को भारत छोडऩे मजबूर कर दिया, लेकिन यह एक राजनैतिक सौदा था जिसके पीछे अंग्रेजों क

समग्र ब्राह्मण महासभा की आगामी कार्य योजना

कार्यकारिणी बैठक में उपस्थित विप्र जनों के समक्ष लाये गये प्रस्तावों में चर्चा कर निम्नलिखित निर्णय क्रियान्वयन हेतु लिये गये थे । आशा है आगामी कार्यकारिणी की बैठक के पूर्व इन संदर्भों में आपके द्वारा की गयी कार्यवाही से कार्यकारिणी अवगत होना चाहेगी ।

एक मुलाकात - श्री रामू प्रसाद शर्मा

वर्तमान में छत्तीसगढ़ में ब्राह्मणों में एकता के विषय में संक्षिप्त रूप में अपना मत देते हुए श्री रामू प्रसाद शर्मा श्रीयूपारीण ब्राह्मण समाज के कार्यकारी महासचिव ने कहा कि विगत 30 वर्षों से सामाजिक संगठनों में कार्य किया किन्तु मेरा अनुभव कहता है कि एकता संभव नहीं है । इसका सबसे बड़ा कारण है अह

सामाजिक संस्थाओं का औचित्य

आज लगभग सभी समाजों ने अपनी संस्थाएं अथवा ट्रस्ट बनाकर पंजीकृत करवा रखे हैं और यदा-कदा शासकीय लाभ लेने में भी पीछे नहीं रहते किन्तु सवाल यह है कि जिस समाज के नाम से संस्था बनी उसके सदस्यों को क्या मिला ? हमने बड़ी - बडी धर्मशालाएं और भवन खड़े कर लिए मदिरों का जीर्णोद्वार अमूमन चलता ही रहता है ।

सत्ता के लिए राजनीति न बांटे

कांग्रेस पार्टी यह अपेक्षा करती है कि भाजपा अमरनाथ को चुनावी और धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा न बनाए । ऐसी ही अपेक्षा अयोध्या को लेकर कांग्रेस ने की थी और काशी मथुरा के लेकर भी कांग्रेस पार्टी क्या भाजपा और संघ परिवार के एजेंडे उसकी सोच राजनीति की रणनीति से पूरी तरह अपरिचित है जो वह ऐसी अपेक्षा करती

माघ पूर्णिमा पर मेले अनेक

माघ पूर्णिमा पर पड़ने वाले विभिन्न रंग-बिरंगे मेले अपनी अद्भुत छटा बिखेरते है । इन मेलों में प्रमुख है, राजिम का माघ मेला जो अब रुप लेता जा रहा है । इसके अतिरिक्त माघ पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले और भी कई मेले हैं ।

कवर्धा की दानदाता शकूंतला माता

कवर्धा ब्राह्मण समाज की जानी मानी हस्ती दानदाता शकूंतला माता है जिनका पूरा नाम शकूंतला शर्मा है । इनके पिता जी का नाम स्व- दुर्गा प्रसाद शर्मा है अभी शकूंतला माँ की उम्र लगभग73 वर्ष की हो रही है उसके बावजूद समाज के विकास के लिए हमेशा अग्रणी रहती है ।

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