दशहरे का पर्व दसों प्रकार के पापों को काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है । हजारों वर्षों के कालक्रम में रूढ़ होते हुए जगह जगह की माटी की सौंधि गंध से कालान्तर में यह महोत्सव अपने अलग अलग रूपों में आयोजित एवं परिवर्धित होता रहा है ध