रावण

महर्षि विश्वामित्र भगवान राम के गुरू

महर्षि विश्वामित्र जी को भगवान श्री राम का दूसरा गुरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । वे दण्डकारण्य में यज्ञ कर रहे थे जहां रावण के द्वारा भेजे गये ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे राक्षसों ने बार बार यज्ञ में व्यवधान उत्पन्न किया तब विश्वामित्र ने अपने तपोबल से यह ज्ञात कर लिया की तीनों लोको को भय त

सद्प्रेरणा का पर्व दशहरा

दशहरे का पर्व दसों प्रकार के पापों को काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है । हजारों वर्षों के कालक्रम में रूढ़ होते हुए जगह जगह की माटी की सौंधि गंध से कालान्तर में यह महोत्सव अपने अलग अलग रूपों में आयोजित एवं परिवर्धित होता रहा है ध

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