विश्वामित्र

महर्षि विश्वामित्र भगवान राम के गुरू

महर्षि विश्वामित्र जी को भगवान श्री राम का दूसरा गुरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । वे दण्डकारण्य में यज्ञ कर रहे थे जहां रावण के द्वारा भेजे गये ताड़का, सुबाहु और मारीच जैसे राक्षसों ने बार बार यज्ञ में व्यवधान उत्पन्न किया तब विश्वामित्र ने अपने तपोबल से यह ज्ञात कर लिया की तीनों लोको को भय त

रामायण के पात्र महर्षि वशिष्ठ

रामायण के पात्र महर्षि वशिष्ठ के भागीरथ प्रयत्न से गंगा धरती पर
महर्षि वशिष्ठ का वर्णन पुरानों में कई रुपों में बताया गया है । ब्रह्मा के मानस पुत्र , मित्रावरूण के पुत्र, अग्नि के पुत्र कहे जाते हैं । इनकी पत्नि का नाम अरूंधती देवी था ।

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