वेदों में भी श्री हनुमान जी के स्वरूप् कार्य एंव सेवा की प्रशंसा की गयी है सभी सम्प्रदायों में इनके स्वरूप को निर्धारित किया गया है।
वेदावतार श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण में , अध्यात्म रामायण में रामचरितमानस में गोस्वामी जी ने तो इनके नाम पर सुन्दरकाण्ड ही लिख दिया है ।