विचार

नये परिवेश में-विवाह में विचार

भारत में अभी भी शादी - ब्याह के लिये कूंडलियों को मिलाने पर काफी जोर दिया जाता है । इसके बाद लड़के की नौकरी, जमीन जायदाद और लड़की की सुंदरता और खाना पकाने की कला देखी जाती है । अगर सब कुछ ठीक ठाक रहता है तो वह और वधू पक्ष में थोड़ी सीबातचीत के बाद रिश्ता तय कर दिया जाता है । अरेंज मैरिज में इन्हीं ब

सामाजिक संस्थाओं का औचित्य

आज लगभग सभी समाजों ने अपनी संस्थाएं अथवा ट्रस्ट बनाकर पंजीकृत करवा रखे हैं और यदा-कदा शासकीय लाभ लेने में भी पीछे नहीं रहते किन्तु सवाल यह है कि जिस समाज के नाम से संस्था बनी उसके सदस्यों को क्या मिला ? हमने बड़ी - बडी धर्मशालाएं और भवन खड़े कर लिए मदिरों का जीर्णोद्वार अमूमन चलता ही रहता है ।

वेदों में हनुमात् चिन्तन

वेदों में भी श्री हनुमान जी के स्वरूप् कार्य एंव सेवा की प्रशंसा की गयी है सभी सम्प्रदायों में इनके स्वरूप को निर्धारित किया गया है।

वेदावतार श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण में , अध्यात्म रामायण में रामचरितमानस में गोस्वामी जी ने तो इनके नाम पर सुन्दरकाण्ड ही लिख दिया है ।

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