सरस्वती संस्कृत उवाच -
"साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात पशु: पुच्छविषाण हीन:"
अर्थात् हम अपने जीवन को पशुता से उपर उठाकर विद्या संपन्न, गुण संपन्न बनाएं, बसंत पंचमी इसी प्रेरणा का त्यौहार है ।।
सरस्वती पर्व बसंत पंचमी शिक्षा, साक्षरता, विद्या और विनय का पर्व है ।