Vipra

संपादक के नाम पत्र

अपने सर्वब्राह्मण समाज के विषय में आपको जानकारी देना चाहूंगा कि मैं स्वयं बलराम त्रिपाठी जो कि अनूपपुर जिलेकी सर्वब्राह्मण समाज की गतिविधियो ंकी रुपरेखा एवं विस्तारण हेतु प्रयासरत रहता हूं । हमारा निवास नगर (बिजुरी) जो कि मनेन्द्रगढ़ से 16 कि.मी. एवं अनूपपुर से 40 कि.मी. अंम्बिकापुर रेल सेवा लाईन के मध्य का एक छोटा सा नगर है जो कि हसदेव क्षेत्र (कोयलांचल) का मुख्य उत्पादक क्षेत्र से भी जाना जाता है ।

श्री वीरेन्द्र पाण्डे जी एवं श्री अजय त्रिपाठी जी के मनेन्द्रगढ़ प्रवास के दौरान हम सभी ब्राह्मण समाज बिजूरी एवं अनूपपुर के पदाधिकारियों के साथ मुख्यधारा से जुड़ने की पहल की । यहां से लगभग बिजुरी, कोतमा, अनूपपुर, राजनगर, रामनगर, पौराधार आदि विभिन्न जनसंख्या बाहुल्य क्षेत्रों में ब्राह्मण वर्ग की जनसंख्या अत्याधिक है । इसलिए यहां पर पत्रिका एवं सदस्यता का विस्तार अति तीव्र गति से गतिमान हो रहा है ।

मगर पत्राचार एवं डाक सुविधा के ही माध्यम से यहा ंपर इस सामाजिक गतिविधि का तंत्री से विकास हो सकता है। चूंकि इन्टरनेट की सुविधा यहां पर सिर्फ बी.एस.एन.एल. के माध्यम से ही उपलब्ध हो पाती है । इसलिए हमें नेट प्रणाली के उपयोग में अत्याधिक असुविधा का सामना करना पड़ता है और महोदय एक और समस्या यह है कि यहां पर चूंकि यह मध्यप्रधेश में आता है तो बिजली कटौती की समस्या लगभग 4 से 5 घण्टे बनी रहती है ।  read more »

Ajay Tripathi's picture

विप्र वंशज ही कर सकते हैं समाज की रक्षा

आदिकाल से भारतीय संस्कृति की रक्षा ब्राह्मणों से हुई है । ब्राह्मणों और गायों की रक्षा के लिए भगवान के अवतार हुए हैं । कहा गया है कि -विप्र धेनु सुर सन्त हित लीन्ह मनुज अवतार । विप्र वंश सदा समाज की सेवा में लगा रहा । भगवान का आशीर्वाद भी उसे अवश्य मिलता रहा । उदार भावना से ओतप्रोत होकर ब्राह्मणों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया । आदिकाल से एक सूत्र में बांधने के लिए विप्र समाज ने ही कार्य किया है । भगवान राम -कृष्ण ने स्वयं कहा है -

विप्र प्रसादा कमला वरोहम,
विप्र प्रशादा धरणि धरोहम्
विप्र प्रशादा बैकुन्ठाधिपत्यम्,
विप्र प्रसादा मम राम नाम् ॥  read more »

विशेष + प्रमुख = विप्र = फक्तस अभियानम्

शक्ति शास्त्र तथा सम्पत्ति की पार्वती, सरस्वती एवं लक्ष्मी के योग से जागृत ब्रह्मशक्ति, ब्रह्मविद्या वेदान्त के समत्व की मानवता की प्रेरक है । विश्व के प्रथम संविधान मानव धर्म शास्त्र मनुस्मृति एवं चाणक्य नीति के अनुसार संधे शक्ति: का प्रारंभ ग्राम, क्षेत्र प्रमुख से प्रारंभ होता है । सत्संग एवं सामूहिक प्रार्थना से 10 ग्रामों के संयोजक प्रतिनिधि का नाम दशपति एवं 100 ग्रामों पर शतपति तथा 1000 ग्रामों पर सहसत्रपति एक हजारी के नामांकन की परम्परा के अनुसार भारत वर्ष के 600 जिलों में संजोयक प्रतिनिधियों के चयन से चाणक्य चंद्रगुप्त की क्रान्ति आज भी संभव है ।

प्रथम चरण में भारत राष्ट्र के उत्तर, पूर्व, मध्य, दक्षिण का मनोनयन किया जाय । ये संयोजक जनपद स्तर के प्रतिनिधियों का नामांकन करे । जनपद प्रतिनिधि अपने जिले के प्रत्येक गांव में एक समाज सेवी कवि, लेखक, अध्यापक, विद्वान या व्यापारी का नामांकन करे जो कि पर्व जयंती कार्यक्रमों को स्थानीय धर्मस्थलों में संस्थानों में शास्त्र विधि से आयोजित करावे । सामूहिक यज्ञोपवित संस्कारों के साथ साथ सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शन के माध्यम से स्वयम्बरम विवाह परिचय सम्मेलन भी आयोजित किए जाये ।  read more »

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